देहरादून। उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने कैबिनेट विस्तार के बाद विभागों के आवंटन के साथ ही शासन की नई तस्वीर साफ कर दी है। मुख्यमंत्री ने अपनी टीम को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से खुद के पास मौजूद भारी-भरकम विभागों का बोझ कम करते हुए सहयोगियों पर भरोसा जताया है।
अब तक 35 से ज्यादा विभागों का जिम्मा संभाल रहे मुख्यमंत्री के पास अब केवल 18 विभाग रहेंगे।
शासन द्वारा जारी आधिकारिक सूची के अनुसार, मुख्यमंत्री ने गृह, सतर्कता, कार्मिक, नियुक्ति एवं प्रशिक्षण और सूचना एवं जनसंपर्क जैसे ‘कोर’ विभागों को अपने पास रखा है।
यह कदम दर्शाता है कि मुख्यमंत्री राज्य की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक नियंत्रण की कमान सीधे अपने हाथों में रखना चाहते हैं। वहीं, आपदा प्रबंधन और परिवहन जैसे महत्वपूर्ण विभागों को अन्य मंत्रियों में बांट दिया गया है।
इस फेरबदल में सबसे चौंकाने वाला बदलाव स्वास्थ्य विभाग में देखा गया है। डॉ. धन सिंह रावत से स्वास्थ्य विभाग वापस ले लिया गया है और अब यह जिम्मेदारी सुबोध उनियाल को सौंपी गई है।
उनियाल के पास अब वन के साथ-साथ संसदीय कार्य, विधायी और स्वास्थ्य जैसे बड़े विभाग होंगे। हाल के दिनों में चौखुटिया और पिलखी में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर हुए जन आंदोलनों के बाद इस बदलाव को सरकार की डैमेज कंट्रोल रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
मंत्रिमंडल में शामिल नए चेहरों को भी सीएम धामी ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी हैं। पहली बार मंत्री बने राम सिंह कैड़ा को राज्य के बढ़ते शहरीकरण की चुनौतियों से निपटने के लिए शहरी विकास विभाग सौंपा गया है।
रुड़की विधायक प्रदीप बत्रा को परिवहन और आईटी विभाग की कमान मिली है, जबकि भरत सिंह चौधरी को ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने के लिए ग्राम्य विकास और एमएसएमई (MSME) विभाग दिया गया है।
अनुभवी नेताओं में मदन कौशिक को आपदा प्रबंधन एवं आयुष विभाग की जिम्मेदारी दी गई है, जो हिमालयी राज्य के लिए अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।
वहीं, सतपाल महाराज को सामान्य प्रशासन विभाग देकर संतुलन साधने की कोशिश की गई है, हालांकि उनसे जलागम और पंचायती राज जैसे विभाग वापस ले लिए गए हैं। खजान दास को समाज कल्याण विभाग के जरिए दलित और पिछड़े वर्गों के बीच सरकार की पैठ बढ़ाने का जिम्मा मिला है।
राज्य की राजनीति के जानकारों का मानना है कि यह बंटवारा केवल विभागों का आवंटन नहीं, बल्कि आगामी चुनावी चुनौतियों को देखते हुए क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को साधने का प्रयास है।
विशेष रूप से कुमाऊं और गढ़वाल के बीच संतुलन बनाने के साथ-साथ पुराने दिग्गजों और नए रक्त के बीच समन्वय बिठाने की कोशिश की गई है।









