देहरादून। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पुष्कर सिंह धामी सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में सीधे तौर पर ‘युवा और सुरक्षा’ का कार्ड खेल दिया है। सचिवालय में हुई इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग में 16 प्रस्तावों पर मुहर लगी, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा ‘वीर उद्यमी योजना’ की है।
असल में, सरकार ने उन अग्निवीरों और पूर्व सैनिकों के लिए तिजोरी खोल दी है जो खुद का काम शुरू करना चाहते हैं। अब उन्हें सामान्य सब्सिडी के ऊपर 5% का एक्स्ट्रा बोनस मिलेगा। सीधा संदेश है—मैदान हो या पहाड़, स्वरोजगार में अड़ंगा बर्दाश्त नहीं होगा।
पर सवाल ये है कि क्या केवल योजनाएं काफी हैं? सीएम धामी ने साफ कर दिया कि मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग का असर उत्तराखंड की सप्लाई चेन पर नहीं पड़ना चाहिए। हैरानी की बात ये है कि राज्य सरकार ने पुलिस और वन विभाग की भर्तियों में बड़ा यू-टर्न लिया है। नए नियम अब ठंडे बस्ते में हैं। साल 2029 तक सिपाही और दरोगा भर्ती पुराने उम्र और हाइट के मानकों पर ही होगी। यानी युवाओं को फिलहाल तैयारी के लिए पुरानी राहत मिलती रहेगी।
एक खास जानकारी जो आपको जाननी चाहिए—उत्तराखंड अब देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है जिसने दंगाइयों और प्रदर्शनकारियों से नुकसान की भरपाई के लिए विशेष ‘ट्रिब्यूनल’ बनाने की प्रक्रिया को कानूनी रूप से इतना सख्त कर दिया है। उत्तर प्रदेश की तर्ज पर अब यहाँ भी नुकसान की वसूली सीधे उपद्रवियों की संपत्ति कुर्क करके की जा सकेगी।
किसानों के लिए भी खबर पक्की है। गेहूं अब ₹2558 प्रति क्विंटल के भाव बिकेगा। मंडियों की मनमानी पर लगाम कसते हुए शुल्क 2% पर लॉक कर दिया गया है। वहीं, न्यायिक अधिकारियों को 10 लाख तक का कार लोन महज 4% ब्याज पर थमाया जाएगा। सरकारी बाबुओं के लिए भी प्रमोशन का रास्ता साफ हुआ—25 साल का इंतजार खत्म, अब 22 साल की नौकरी पर ही मुख्य प्रशासनिक अधिकारी की कुर्सी मिल जाएगी।
सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वाले अब सावधान रहें, नई वसूली नियमावली के तहत बिना देरी के कुर्की की कार्रवाई शुरू की जाएगी।









