उत्तरकाशी। देवभूमि के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कुदरत का मिजाज एक बार फिर तल्ख हो गया है। चारधाम यात्रा (Char Dham Yatra 2026 Updates) के पहले पड़ाव यमुनोत्री धाम में पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी बर्फबारी ने प्रशासन और स्थानीय लोगों की नींद उड़ा दी है।
मंदिर परिसर और पैदल मार्ग पर इस समय करीब चार से पांच फीट तक बर्फ की मोटी चादर बिछी हुई है। हालात इतने चुनौतीपूर्ण हैं कि कपाट खुलने की तैयारियों के लिए जरूरी रसद और अन्य सामान जानकीचट्टी से आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
कपाट खुलने में अब एक महीने से भी कम का समय बचा है। परंपरा के अनुसार, यमुनोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल 2026 को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर खोले जाने हैं।
लेकिन रास्ते में जमी बर्फ ने इस समय सारे काम रोक दिए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर मौसम जल्द साफ नहीं हुआ, तो पैदल मार्ग की मरम्मत और सफाई का काम समय पर पूरा करना नामुमकिन हो जाएगा।
मौसम विभाग का सात दिनी अलर्ट
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के देहरादून केंद्र ने आने वाले एक हफ्ते के लिए खतरनाक पूर्वानुमान जारी किया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, 3300 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी का सिलसिला थमने वाला नहीं है। उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।
| तारीख | प्रभावित इलाके | संभावित मौसम |
| 26-27 मार्च | पहाड़ी जिले | मध्यम बारिश और गरज-चमक |
| 28 मार्च | उच्च हिमालयी क्षेत्र | हल्की बर्फबारी जारी रहेगी |
| 29 मार्च | पूरे प्रदेश के पहाड़ | भारी बारिश और तेज हवाएं |
| 30-31 मार्च | पहाड़ी व मैदानी क्षेत्र | छिटपुट बारिश और ओलावृष्टि |
50 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
मौसम विभाग ने 27 और 29 मार्च को लेकर ‘स्पेशल वार्निंग’ जारी की है। इन दो दिनों में पहाड़ी जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं। आकाशीय बिजली गिरने का भी खतरा बना हुआ है, जिसे देखते हुए यात्रियों और स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि मैदानी इलाकों में मौसम ज्यादातर शुष्क रहेगा, लेकिन तापमान में 1 से 2 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।
पहली बार कड़ा पहरा और नई पाबंदियां
इस साल की चारधाम यात्रा पिछले वर्षों से अलग होने वाली है। हालिया अपडेट के अनुसार, उत्तराखंड सरकार ने इस बार श्रद्धालुओं के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है। इसके अलावा, आध्यात्मिक मर्यादा बनाए रखने के लिए मंदिर परिसर के 100 मीटर के दायरे में मोबाइल फोन और कैमरे के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
केदारनाथ और बद्रीनाथ की तर्ज पर अब यमुनोत्री में भी भारी बर्फबारी के बीच रास्ता साफ करने के लिए बीआरओ (BRO) की मशीनों को तैनात करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि 19 अप्रैल से पहले ट्रैक को सुचारू किया जा सके।









