देहरादून। उत्तरांचल यूनिवर्सिटी के बीटेक छात्र दिव्यांशु जटराना (Divyanshu Jatrana Murder Case) की नृशंस हत्या के बाद अब देहरादून पुलिस के सामने अपराधियों का ‘बिहार नेटवर्क’ बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।
सोमवार रात प्रेमनगर के केहरी गांव में हुई इस वारदात के बाद अधिकांश नामजद आरोपी पुलिस को चकमा देकर बिहार में अपने सुरक्षित ठिकानों पर पहुंच चुके हैं। एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल के निर्देश पर दून एसओजी और प्रेमनगर पुलिस की संयुक्त टीमें अपराधियों को दबोचने के लिए बिहार रवाना हो चुकी हैं।
पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में यह साफ हुआ है कि यह वारदात महज एक तात्कालिक झगड़ा नहीं, बल्कि यूपी और बिहार के छात्र गुटों के बीच लंबे समय से चली आ रही वर्चस्व की जंग का नतीजा थी। घटनास्थल पर आरोपियों ने दिव्यांशु को घेरकर फावड़े और लाठी-डंडों से इतनी बेरहमी से पीटा कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया।
हालांकि पुलिस ने मौके से तीन आरोपियों—युवराज कुमार, मधुर खंडेलवाल और शिवम शर्मा को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन हमले में शामिल 12 अन्य मुख्य आरोपी अभी भी कानून की गिरफ्त से दूर हैं।
जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया है कि इस साल की शुरुआत से ही कैंपस में हिंसक झड़पें हो रही थीं। कुछ महीने पहले एक विवाद में एक छात्र की उंगली काट दी गई थी, जबकि दूसरी घटना में एक छात्र की आंख गंभीर रूप से जख्मी हुई थी।
स्थानीय इंटेलिजेंस और पुलिस इन छिटपुट घटनाओं को भांपने में नाकाम रही, जिसका अंजाम सोमवार की रात एक होनहार छात्र की मौत के रूप में सामने आया। दिव्यांशु मुजफ्फरनगर के ग्राम अथाई (थाना भोपा) का निवासी था और देहरादून में अपनी पढ़ाई पूरी कर रहा था।
इस हत्याकांड ने अब राजनीतिक और सामाजिक मोड़ ले लिया है। अंतरराष्ट्रीय जाट संसद ने पुलिस प्रशासन को खुली चेतावनी दी है कि अगर 29 मार्च तक सभी हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो पूरा जाट समाज देहरादून में जुटकर विधानसभा का घेराव करेगा। इस दबाव के बीच पुलिस ने अब हॉस्टल संचालकों पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने प्रेमनगर और सेलाकुई क्षेत्र के यूनिवर्सिटी प्रबंधन और हॉस्टल संचालकों के साथ इमरजेंसी मीटिंग की है। पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि भविष्य में किसी छात्र की आपराधिक संलिप्तता पाई जाती है, तो केवल छात्र ही नहीं, बल्कि उस संस्थान और हॉस्टल मालिक के खिलाफ भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अब बाहरी छात्रों के सत्यापन और उनकी गतिविधियों पर पैनी नजर रखने के लिए नया प्रोटोकॉल तैयार कर रही है।









