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उत्तराखंड वालों को लगने वाला है डबल झटका, 1 अप्रैल से बिजली और पानी दोनों होंगे महंगे

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देहरादून। उत्तराखंड के उपभोक्ताओं के लिए अप्रैल का महीना जेब पर भारी पड़ने वाला है। प्रदेश में 1 अप्रैल से पानी की नई दरें लागू होने जा रही हैं, जबकि बिजली की दरों पर 31 मार्च को अंतिम फैसला सुनाया जाएगा। जल संस्थान ने स्पष्ट किया है कि घरेलू श्रेणी के पानी बिलों में 9 प्रतिशत और व्यावसायिक श्रेणी में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाएगी। यह वृद्धि साल 2013 के बेस रेट के आधार पर हर साल होने वाली रूटीन प्रक्रिया का हिस्सा है।

शहरी क्षेत्रों में पानी के बिलों का निर्धारण भवन कर (House Tax) के मूल्य के आधार पर होता है। इस बार शहरों में औसतन पानी का बिल जो अभी तक 360 रुपये महीना था, वह बढ़कर 373 रुपये हो जाएगा।

वहीं, ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को अब हर महीने 117 रुपये की जगह 121 रुपये का भुगतान करना होगा। जल संस्थान के सीजीएम डीके सिंह ने पुष्टि की है कि नई दरें तैयार हैं और इन्हें तय समय पर लागू कर दिया जाएगा।

बिजली की बात करें तो उपभोक्ताओं पर ‘डबल अटैक’ होने की आशंका है। एक तरफ 31 मार्च को सालाना बिजली दरों (Tariff) में बदलाव की घोषणा होगी, वहीं अप्रैल के पहले हफ्ते में फ्यूल पावर परचेज कॉस्ट एडजेस्टमेंट (FPPCA) की नई दरें भी जारी की जा सकती हैं। हालांकि यह चुनावी साल है, इसलिए कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को मामूली राहत दे सकती है।

लेकिन ऊर्जा निगम (UPCL) ने अपने भारी-भरकम घाटे और खर्चों की भरपाई के लिए नियामक आयोग के सामने करीब 16.23 प्रतिशत तक की औसत वृद्धि का प्रस्ताव रखा है।

विशेष जानकारी के मुताबिक, इस साल केवल टैरिफ ही नहीं बल्कि ‘ओपन एक्सेस’ के तहत बिजली खरीदने वाले बड़े उपभोक्ताओं पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। आयोग ने 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक के लिए 1.05 रुपये प्रति यूनिट का अतिरिक्त सरचार्ज लगाने की तैयारी कर ली है। यह उन उपभोक्ताओं पर लगेगा जो सीधे एक्सचेंज या अन्य स्रोतों से बिजली खरीदते हैं।

पिछले साल यानी 2025 में भी बिजली के दामों में 5.62 प्रतिशत का इजाफा हुआ था। उस समय यूपीसीएल ने 12.01 प्रतिशत की मांग की थी, लेकिन आयोग ने उसे आधा कर दिया था। इस बार भी विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष एम.एल. प्रसाद ऊर्जा निगमों के प्रस्तावों की गहन पड़ताल कर रहे हैं।

अधिकारियों का कहना है कि बिजली की बढ़ती खरीद लागत को देखते हुए दरों में कुछ न कुछ बदलाव तो निश्चित है, जिसका सीधा असर प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं के मासिक बजट पर पड़ेगा।

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