देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी समेत प्रदेश के कई हिस्सों में रसोई गैस की होम डिलीवरी की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। आंकड़ों की मानें तो हरिद्वार के बाद देहरादून की वितरण व्यवस्था सबसे सटीक है, लेकिन इसके बावजूद उपभोक्ताओं को बुकिंग के बाद औसतन 5.22 दिन तक सिलेंडर का इंतजार करना पड़ रहा है।
शहर की करीब 70 गैस एजेंसियों पर भगवानपुर, हरिद्वार और लोनी स्थित बॉटलिंग प्लांटों से सप्लाई तो जारी है, लेकिन कुछ इलाकों में सिलेंडर पहुंचने में 8 से 10 दिन का समय लग रहा है।
देहरादून जिला प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए फिलहाल नए एलपीजी कनेक्शन देने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। तेल कंपनियों का तर्क है कि नए कनेक्शन के साथ भरा हुआ सिलेंडर देना अनिवार्य होता है, जिससे मौजूदा स्टॉक पर दबाव बढ़ेगा। प्रशासन का पूरा जोर फिलहाल पुराने बैकलाग को क्लियर करने और कालाबाजारी रोकने पर है।
अफवाहों ने बिगाड़ा खेल, सर्वर पर बढ़ा लोड
मार्च के दूसरे हफ्ते में गैस की भारी किल्लत होने की अफवाहों ने बाजार का गणित बिगाड़ दिया। 11 से 13 मार्च के बीच अचानक बुकिंग में भारी उछाल आया, जिससे तेल कंपनियों के सॉफ्टवेयर और सर्वर क्रैश होने की नौबत आ गई।
उस दौरान 25 और 45 दिन का अनिवार्य वेटिंग पीरियड (Lock-in period) सख्ती से लागू नहीं था, जिसका फायदा उठाकर लोगों ने पैनिक बुकिंग की। अब स्थिति धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है, लेकिन बॉटलिंग प्लांट के किसी भी दिन बंद रहने से बैकलाग फिर से बढ़ जाता है।
इन 7 शहरों में डिलीवरी का क्या है हाल?
उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों में गैस सिलेंडर पहुंचने का औसत समय अलग-अलग है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल स्थिति कुछ इस प्रकार है:
| शहर | औसत वितरण समय (दिन) |
| हरिद्वार | 4.5 दिन |
| देहरादून | 5.22 दिन |
| ऋषिकेश | 5.7 दिन |
| टिहरी | 5.7 दिन |
| रुद्रपुर | 5.76 दिन |
| हल्द्वानी | 6.45 दिन |
| अल्मोड़ा | 6.83 दिन |
कालाबाजारी और ‘घोस्ट डिलीवरी’ पर सख्त एक्शन
ताजा इनपुट के अनुसार, हरिद्वार और देहरादून में कई उपभोक्ताओं को सिलेंडर मिले बिना ही ‘डिलीवरी सक्सेसफुल’ के मैसेज आ रहे हैं। इस ‘घोस्ट डिलीवरी’ और घरेलू गैस के कमर्शियल इस्तेमाल को रोकने के लिए प्रशासन ने क्विक रिस्पांस टीम (QRT) को अलर्ट कर दिया है। देहरादून में हाल ही में कालाबाजारी के आरोप में 3 लोगों को जेल भेजा गया है और भारी मात्रा में सिलेंडर जब्त किए गए हैं।
केंद्र सरकार ने भी साफ कर दिया है कि पश्चिम एशिया के तनाव के बावजूद भारत के पास अगले 60 दिनों का पर्याप्त स्टॉक है। भारतीय नौसेना के संरक्षण में ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’ जैसे बड़े जहाज 92,000 टन एलपीजी लेकर भारतीय तटों पर पहुंचने वाले हैं, जिससे अगले कुछ दिनों में उत्तराखंड के बैकलाग में बड़ी कमी आने की उम्मीद है।









