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पीएम मोदी के दौरे को लेकर देहरादून में निर्माण कार्यों पर रोक, सुरक्षा और सफाई के कड़े इंतजाम

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देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित भ्रमण को लेकर हलचल तेज हो गई है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस हाईवे के बहुप्रतीक्षित लोकार्पण कार्यक्रम में पीएम मोदी के शामिल होने की संभावना के बीच पूरा प्रशासनिक अमला अलर्ट मोड पर है।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने शनिवार को जिले के आला अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने साफ किया कि तैयारियों में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डीएम ने लोक निर्माण विभाग और एनएचएआई को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री के संभावित रूट का तत्काल सर्वे कर मरम्मत कार्य शुरू किया जाए। सड़कों के गड्ढे भरने से लेकर डिवाइडर के सुंदरीकरण का काम डेडलाइन के भीतर पूरा करना होगा।

शहर की खूबसूरती और सुरक्षा में बाधा बन रही बिजली की लाइनों पर भी गाज गिरी है। जिलाधिकारी ने यूपीसीएल (UPCL) को सख्त हिदायत दी है कि अंडरग्राउंड केबलिंग के दौरान सड़क किनारे छोड़ी गई केबलों को तुरंत हटाया जाए। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि प्रधानमंत्री के काफिले और आम जनता के आवागमन में कोई रुकावट न आए। नगर निगम को भी पूरे रूट और कार्यक्रम स्थल पर विशेष सफाई अभियान चलाने को कहा गया है।

सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। पीएम मोदी के दौरे के मद्देनजर प्रस्तावित रूट पर जितने भी निर्माण कार्यों के लिए पहले अनुमति दी गई थी, उन्हें तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। जब तक प्रधानमंत्री का कार्यक्रम संपन्न नहीं हो जाता, इन क्षेत्रों में कोई भी नया निर्माण या खुदाई का काम नहीं होगा।

कार्यक्रम स्थल पर सुविधाओं का खाका खींचते हुए डीएम ने मंच निर्माण, सुरक्षा घेरा, वीआईपी पार्किंग और मोबाइल टॉयलेट्स के इंतजामों की जिम्मेदारी तय कर दी है। बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र डोभाल और मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह समेत जिले के सभी बड़े अधिकारी मौजूद रहे। पुलिस प्रशासन को रूट डायवर्जन और सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर फुलप्रूफ प्लान तैयार करने को कहा गया है।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे न केवल उत्तराखंड के पर्यटन के लिए गेम-चेंजर साबित होगा, बल्कि यह दिल्ली से दून की दूरी को महज 2.5 घंटे में समेट देगा। इस प्रोजेक्ट का लोकार्पण राज्य के बुनियादी ढांचे के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है, यही वजह है कि सरकार इसे एक बड़े उत्सव के रूप में पेश करने की तैयारी में है।

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