---Advertisement---

देहरादून के सरकारी अस्पतालों में अब नहीं होगी स्टाफ की कमी, DM ने तैनात किए 34 नए कर्मचारी

---Advertisement---

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी और इसके सुदूरवर्ती पहाड़ी इलाकों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने धरातलीय निरीक्षण के बाद जिले के अस्पतालों में खाली पड़े पदों को भरने के लिए आउटसोर्सिंग के माध्यम से 34 कार्मिकों की तैनाती कर दी है।

यह फैसला मुख्यमंत्री के उन निर्देशों के बाद लिया गया है, जिसमें सरकारी अस्पतालों को ‘स्वास्थ्य मंदिर’ के रूप में विकसित करने की बात कही गई थी। खास बात यह है कि इन कर्मियों के वेतन के लिए बजट की स्वीकृति जिलाधिकारी ने जिला योजना से प्रदान की है, ताकि वित्तीय बाधाओं के कारण जनसेवा न रुके।

जिला प्रशासन की इस पहल का सबसे बड़ा लाभ ऋषिकेश और मसूरी जैसे पर्यटन केंद्रों के साथ-साथ त्यूणी और चकराता जैसे जनजातीय क्षेत्रों को मिलेगा। ऋषिकेश उप जिला चिकित्सालय में सबसे अधिक 13 कार्मिकों की नियुक्ति की गई है, जिनमें लैब टेक्नीशियन और कक्ष सेवक शामिल हैं। वहीं, मसूरी के अस्पताल को 7 नए कर्मचारी मिले हैं, जो वहां आने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को बेहतर सुविधा देंगे।

स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए कोरोनेशन अस्पताल स्थित राज्य के पहले मॉडल टीकाकरण केंद्र में 7 कर्मियों की टोली तैनात की गई है। इसमें डेटा एंट्री ऑपरेटर (DEO) से लेकर पर्यावरण मित्र तक शामिल हैं। कोरोनेशन के ही विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) के लिए 2 वाहन चालकों की अलग से व्यवस्था की गई है, जो आपातकालीन सेवाओं में मददगार साबित होंगे।

दुर्गम क्षेत्र त्यूणी और चकराता के प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मैनपावर की भारी कमी थी, जिसे देखते हुए वहां कक्ष सेविका और पर्यावरण मित्रों की तैनाती सुनिश्चित की गई है। इसके अलावा, पोस्टमार्टम हाउस (शव विच्छेदन गृह) के लिए भी एक समर्पित कार्मिक नियुक्त किया गया है।

प्रशासन ने केवल वर्तमान नियुक्तियों तक ही सीमित न रहते हुए दूरगामी योजना भी तैयार की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए व्यापक कार्ययोजना बनाते हुए उपनल और PRD के माध्यम से कार्यरत पुराने कर्मचारियों के सेवा विस्तार को भी मार्च 2027 तक की मंजूरी दे दी गई है।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अस्पतालों में संसाधनों की कमी का बहाना बनाकर मरीजों को परेशान न किया जाए। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। राज्य में संभवतः यह पहली बार है जब किसी जिला प्रशासन ने अपने स्तर पर बजट आवंटित कर इतनी बड़ी संख्या में सीधे अस्पतालों में स्टाफ की कमी को दूर किया है।

Join WhatsApp

Join Now
---Advertisement---

Leave a Comment