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CM Dhami का बड़ा दावा: ‘अफवाह फैला रही है कांग्रेस, भाजपा का एक भी सदस्य पार्टी छोड़कर नहीं गया

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देहरादून, 01 अप्रैल (द ऑनलाइन पोस्ट)। उत्तराखंड की सियासत में बीते कुछ दिनों से मचे ‘दलबदल’ के शोर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चुप्पी तोड़ी है। कांग्रेस द्वारा भाजपा के 6 कद्दावर नेताओं को अपने पाले में करने के दावों को सीएम ने सिरे से खारिज कर दिया।

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एक निजी समाचार चैनल के कार्यक्रम में बोलते हुए धामी ने दो टूक कहा कि जो लोग कांग्रेस में शामिल हुए हैं, उनका भाजपा से फिलहाल कोई लेना-देना ही नहीं था। मुख्यमंत्री ने इसे एक सोची-समझी अफवाह करार दिया, जिसका मकसद राज्य में भाजपा को कमजोर दिखाना है।

सीएम धामी ने एक-एक कर उन नेताओं का राजनीतिक इतिहास सामने रख दिया जिन्हें कांग्रेस ‘भाजपा के दिग्गज’ बताकर पेश कर रही है। उन्होंने सितारगंज के पूर्व विधायक नारायण पाल का जिक्र करते हुए कहा कि वह मूल रूप से बसपा में थे और पिछला चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ने की फिराक में थे।

वहीं, रुद्रपुर के पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल पर बोलते हुए धामी ने कहा कि 2022 के चुनाव में पार्टी ने जब दूसरे प्रत्याशी को चुना, तो ठुकराल ने बगावत कर पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ ही चुनाव लड़ा था। ऐसे में वे तकनीकी और नैतिक रूप से भाजपा से बहुत पहले ही बाहर हो चुके थे।

मुख्यमंत्री यहीं नहीं रुके, उन्होंने घनसाली के पूर्व विधायक भीमलाल आर्य की सच्चाई भी उजागर की। धामी ने बताया कि आर्य 2012 में भाजपा के टिकट पर जरूर जीते थे, लेकिन 2013-14 के आसपास ही उन्होंने पार्टी का साथ छोड़ दिया था।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग सालों पहले भाजपा छोड़ चुके हों या जो पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हों, उन्हें भाजपा का बताकर प्रचारित करना केवल दिल्ली तक गलत संदेश भेजने की कोशिश है।

इस दलबदल की लिस्ट में शामिल अन्य नामों जैसे रुड़की के पूर्व मेयर गौरव गोयल, मसूरी के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अनुज गुप्ता और नैनीताल के लाखन सिंह को लेकर भी भाजपा का रुख सख्त है। गौरव गोयल को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते पहले ही भाजपा से निष्कासित किया जा चुका था।

धामी ने ऑन-रिकॉर्ड कहा, “आप इन नेताओं का पोस्टमार्टम मत करिए, बस इतना समझ लीजिए कि इनमें से एक भी वर्तमान में भाजपा का सदस्य नहीं था।” उन्होंने साफ किया कि उत्तराखंड की जनता राष्ट्रवादी है और वह इस तरह के ‘भ्रम के जाल’ में फंसने वाली नहीं है।

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राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि धामी का यह आक्रामक रुख कांग्रेस के उस नैरेटिव को काटने के लिए है जिसमें यह दिखाया जा रहा था कि भाजपा के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। धामी ने जोर देकर कहा कि भाजपा कमजोर होने के बजाय जमीन पर और अधिक मजबूत हो रही है। उन्होंने कांग्रेस पर सवाल दागा कि आखिर क्यों भाजपा से बाहर किए गए लोगों को ‘दिग्गज’ बताकर अपनी पीठ थपथपाई जा रही है।

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