देहरादून, 01 अप्रैल (द ऑनलाइन पोस्ट)। उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों और चार धाम यात्रा के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए धामी सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं का सुरक्षा कवच तैयार कर लिया है। देहरादून के लोक भवन में आयोजित एक विशेष सेमिनार के दौरान स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल और राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) गुरमीत सिंह ने चिकित्सा और सड़क सुरक्षा को लेकर नई रणनीति साझा की।
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सरकार ने स्पष्ट किया है कि देवभूमि आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि राज्य की साख का सवाल है। इसी उद्देश्य से हेमवती नंदन चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय द्वारा तैयार की गई ‘पिलग्रिमेज एजुकेशन हैंडबुक’ को लॉन्च किया गया है, जो यात्रियों के लिए एक गाइड के रूप में काम करेगी।
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने इस मौके पर विभाग की तैयारियों का खाका पेश करते हुए बताया कि यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य सेवाओं को चाक-चौबंद करने के लिए 243 चिकित्सा अधिकारियों की तैनाती सुनिश्चित कर दी गई है। खास बात यह है कि इनमें 33 विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल हैं, जो पहाड़ी रास्तों पर होने वाली आपातकालीन स्थितियों और हार्ट अटैक जैसी समस्याओं से निपटने में सक्षम हैं।
मंत्री ने दो-टूक शब्दों में कहा कि उत्तराखंड के घुमावदार पहाड़ी रास्ते जितने सुंदर हैं, उतने ही चुनौतीपूर्ण भी हो सकते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं, विशेषकर बुजुर्गों को हिदायत दी है कि वे अपनी यात्रा शुरू करने से पहले मेडिकल चेकअप जरूर कराएं। बिना डॉक्टरी परामर्श के ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों की यात्रा करना जोखिम भरा हो सकता है।
सड़क सुरक्षा पर बात करते हुए उनियाल ने ‘गोल्डन आवर’ की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुर्घटना के बाद का शुरुआती एक घंटा किसी भी घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिए सबसे कीमती होता है। सरकार का प्रयास है कि इस दौरान घायल को तत्काल चिकित्सा सहायता मिले, ताकि मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके।
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यह यात्रा केवल आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की आर्थिकी की रीढ़ भी है। होमस्टे योजना और स्थानीय उत्पादों की बढ़ती मांग ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई जान दी है। सरकार का मानना है कि सुरक्षित यात्रा से पर्यटन बढ़ेगा, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के दरवाजे और अधिक खुलेंगे।









