देहरादून, 01 अप्रैल (द ऑनलाइन पोस्ट)। उत्तराखंड में नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले दिन से ही शौकीनों की जेब पर बोझ बढ़ गया है। आबकारी विभाग ने शराब की कीमतों में 10 फीसदी तक की बढ़ोतरी के आदेश जारी कर दिए हैं। दिसंबर में एक्साइज ड्यूटी में किए गए बदलावों और कैबिनेट की मुहर के बाद अब प्रति बोतल ₹5 से लेकर ₹20 तक के दाम बढ़ा दिए गए हैं।
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आबकारी आयुक्त अनुराधा पाल ने स्पष्ट किया कि यह एक वार्षिक प्रक्रिया है, जिसे राजस्व लक्ष्यों को ध्यान में रखकर लागू किया गया है। विभाग ने इस बार तीन साल के लिए दीर्घकालिक आबकारी नीति तैयार की है, जो साल 2028 तक प्रभावी रहेगी। पिछले वर्ष भी कीमतों में 5 प्रतिशत का इजाफा देखा गया था, लेकिन इस बार का उछाल उससे दोगुना है।
दूसरी ओर, शराब के दामों में वृद्धि के बीच नई दुकानों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री और सांसद अजय भट्ट ने नैनीताल जिले के रातीघाट, मंगोली और बजून में प्रस्तावित शराब की दुकानों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बात कर इन ठेकों को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग रखी है।
अजय भट्ट का तर्क है कि विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम के निकट शराब की दुकान खोलना जनभावनाओं का अपमान है। इन क्षेत्रों में शहीद संजय बिष्ट राजकीय इंटर कॉलेज और कई प्राथमिक विद्यालय स्थित हैं। स्थानीय महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा का हवाला देते हुए सांसद ने चेताया है कि शिक्षण संस्थानों के पास मदिरा की बिक्री से छात्रों के मानसिक विकास पर बेहद नकारात्मक असर पड़ेगा।
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राज्य सरकार के डेटा के अनुसार, उत्तराखंड के राजस्व में आबकारी विभाग की हिस्सेदारी लगभग 15-18% रहती है, जो पर्यटन के बाद दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। हालांकि, रातीघाट जैसे ग्रामीण बाजारों में स्थानीय निवासियों के भारी विरोध ने सरकार को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है। अब गेंद मुख्यमंत्री के पाले में है कि वे राजस्व और जनभावनाओं के बीच कैसे संतुलन बिठाते हैं।









