पिथौरागढ़: सरहद की सुरक्षा में तैनात उत्तराखंड के वीर सपूत ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है। जनपद के गणकोट गांव निवासी लांसनायक विकास कुमार सिक्किम के बर्फीले इलाके में कर्तव्य पालन के दौरान शहीद हो गए। 19 कुमाऊं रेजीमेंट में तैनात 24 वर्षीय विकास 29 मार्च को अपने दो साथियों के साथ सीमा पर गश्त कर रहे थे, तभी अचानक आए भीषण हिमस्खलन ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।
तबाही इतनी भयानक थी कि विकास का पार्थिव शरीर करीब दो दिनों तक बर्फ की मोटी चादर के नीचे दबा रहा। सेना के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उनके शव को निकाला गया, जिसकी सूचना मंगलवार शाम करीब 3 बजे सैन्य मुख्यालय से परिजनों को दी गई। हालांकि, सदमे की आशंका के चलते माता-पिता और पत्नी को बुधवार तक इस हृदयविदारक समाचार से अनजान रखा गया था।
नियति का क्रूर खेल देखिए कि जिस घर में विकास के 10 महीने के बेटे पृथ्विक के पहले जन्मदिन की तैयारियां शुरू होने वाली थीं, वहां अब मातम पसरा है। विकास ने अपने चचेरे भाई नीरज से वादा किया था कि वह अप्रैल के आखिरी सप्ताह तक छुट्टी लेकर घर आएंगे ताकि 4 जून को अपने जिगर के टुकड़े का पहला जन्मदिन धूमधाम से मना सकें।
आज वही मासूम पृथ्विक अपनी तोतली आवाज में ‘पापा’ पुकार रहा है, जिसे यह भी नहीं पता कि उसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है।
2017-18 में भारतीय सेना का हिस्सा बने विकास की शादी साल 2023 में प्रीति से हुई थी। घर की माली हालत संभालने के लिए उनकी मां मंजू देवी स्थानीय स्कूल में भोजन माता के रूप में काम करती हैं, जबकि पिता गणेश राम का सहारा अब टूट चुका है। दिल्ली में होटल सेक्टर में कार्यरत बड़ा भाई नीरज खबर मिलते ही गांव पहुंच चुका है।
शहीद का पार्थिव शरीर गुरुवार को जिला मुख्यालय पहुंचने की संभावना है, जहां सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
पूर्वोत्तर भारत के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में इस समय मौसम का मिजाज काफी सख्त है। सिक्किम के जिन इलाकों में विकास तैनात थे, वहां साल के इस समय अचानक हिमस्खलन (Avalanche) का खतरा काफी बढ़ जाता है, क्योंकि तापमान बढ़ने के साथ बर्फ की पुरानी परतें खिसकने लगती हैं।
पूर्व सैनिक संगठन ने विकास की शहादत पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि जिले ने अपना एक जांबाज योद्धा खो दिया है, जिसने अंतिम सांस तक तिरंगे की आन बनाए रखी।









