देहरादून, 06 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। देवभूमि उत्तराखंड में इस बार अप्रैल का मिजाज पूरी तरह बदल गया है, जिसने चारधाम यात्रा की तैयारियों में जुटे प्रशासन और स्थानीय व्यवसायियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
आमतौर पर अप्रैल का महीना यात्रा की अंतिम तैयारियों के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों को सफेद चादर से ढक दिया है। केदारनाथ से लेकर यमुनोत्री तक, हर जगह हाड़ कंपाने वाली ठंड और बर्फबारी ने निर्माण कार्यों की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।
केदारनाथ धाम में हालात सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण हैं। मंदिर परिसर और पैदल मार्ग पर लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीम लगातार बर्फ हटाने का प्रयास कर रही है, लेकिन बार-बार हो रहा हिमपात मेहनत पर पानी फेर रहा है। कड़ाके की ठंड के बीच मजदूरों के लिए काम करना दूभर हो गया है। बर्फ के नीचे दबने से पेयजल आपूर्ति वाली पाइप लाइनें फट गई हैं, जिससे पानी का संकट खड़ा हो गया है।
बिजली और संचार विभाग की टीमें भी मुश्किलों से जूझ रही हैं। रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा खुद इन विषम परिस्थितियों की मॉनीटरिंग कर रहे हैं ताकि कपाट खुलने से पहले व्यवस्थाएं सुधारी जा सकें।
बदरीनाथ धाम और आसपास की पहाड़ियों पर पिछले 15 दिनों से रुक-रुक कर हो रही बर्फबारी ने होटल व्यवसायियों का गणित बिगाड़ दिया है। जोशीमठ होटल एसोसिएशन के मुताबिक, मौसम की बेरुखी की वजह से होटलों के रंग-रोगन और मेंटेनेंस का काम अब तक शुरू नहीं हो सका है।
फूलों की घाटी, औली और कुवांरी पास जैसे पर्यटन स्थल भी बर्फ की चपेट में हैं। बदरीनाथ पहुंचे अग्रिम दल को भी काम शुरू करने के लिए मौसम साफ होने का इंतजार करना पड़ रहा है।
सिखों के पवित्र तीर्थ स्थल हेमकुंड साहिब में स्थिति और भी गंभीर है। यहां वर्तमान में 6 फीट तक बर्फ जमी हुई है। सबसे बड़ी बाधा पैदल मार्ग पर स्थित अटलाकोटी में है, जहां लगभग 10 फीट से अधिक मोटा ग्लेशियर पसरा हुआ है। आगामी 23 मई को धाम के कपाट खुलने हैं और 20 मई को पहला जत्था ऋषिकेश से रवाना होना है। इस रास्ते को साफ करने के लिए भारतीय सेना और सेवादारों का दल 15 अप्रैल को गोविंदघाट से रवाना होगा, जिनके कंधों पर इस दुर्गम बर्फ को काटकर रास्ता बनाने की जिम्मेदारी होगी।
यमुनोत्री धाम में चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों पर भी मौसम की मार पड़ी है। स्नान घाटों, चेंजिंग रूम और नए पुल का निर्माण कार्य बर्फबारी की वजह से धीमा पड़ गया है। जानकी चट्टी और खरसाली में लगातार बारिश से तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे मजदूरों को साइट पर काम करने में दिक्कतें आ रही हैं।
कुमाऊं मंडल में भी मौसम का कहर कम नहीं है। बागेश्वर, नैनीताल और चम्पावत में ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। कपकोट क्षेत्र में भारी ओले गिरने से गेहूं, सरसों और जौ की तैयार फसलें तबाह हो गई हैं। किसानों का कहना है कि पहले सूखे ने मारा और अब ओलावृष्टि ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है। नैनीताल के गरमपानी क्षेत्र में सब्जी उत्पादन पर भी इसका सीधा असर पड़ा है।
मौसम विभाग के निदेशक डॉ. सीएस तोमर के अनुसार, सोमवार को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में बारिश के साथ 3300 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी बर्फबारी की संभावना है। राज्य के मैदानी इलाकों में भी गरज-चमक के साथ हल्की बौछारें पड़ सकती हैं, जिससे तापमान सामान्य से 5 डिग्री नीचे बना रहेगा।









