देहरादून, 06 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड सरकार के खनन विभाग ने अपनी कार्यप्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए तय किए गए सभी राजस्व रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। प्रदेश ने इस साल कुल 1217 करोड़ रुपये का खनन राजस्व प्राप्त किया है, जो निर्धारित लक्ष्य से लगभग 28 प्रतिशत अधिक है। राजस्व का यह आंकड़ा न केवल विभाग की वित्तीय मजबूती को दर्शाता है, बल्कि लगातार दूसरे साल लक्ष्य से आगे निकलने की उपलब्धि भी है।
निदेशक-भूतत्व एवं खनिकर्म, राजपाल लेघा ने वित्तीय आंकड़ों का ब्यौरा देते हुए स्पष्ट किया कि विभाग के लिए वर्ष 2025-26 का लक्ष्य 950 करोड़ रुपये रखा गया था। इसके मुकाबले हुई 1217 करोड़ रुपये की कुल प्राप्ति में से 1130 करोड़ रुपये सीधे सरकारी खजाने (ट्रेजरी) में जमा हुए हैं। इसके अतिरिक्त 80 करोड़ रुपये जिला खनिज फाउंडेशन न्यास (DMF) और सात करोड़ रुपये राज्य खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (SMET) के खाते में गए हैं।
यह लगातार दूसरा अवसर है जब विभाग ने अपनी परफॉरमेंस से सबको चौंकाया है। पिछले वित्तीय वर्ष में भी 875 करोड़ रुपये के लक्ष्य के सामने 1041 करोड़ रुपये की वसूली की गई थी। इस बार राजस्व वृद्धि का ग्राफ और भी ऊंचा रहा है।
उत्तराखंड के इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है, जहां 28 मार्च को नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में खान मंत्रालय ने उत्तराखंड को सीएम श्रेणी के राज्यों में दूसरा स्थान देकर नवाजा है। इस बड़ी उपलब्धि के लिए केंद्र सरकार ने राज्य को 200 करोड़ रुपये की विशेष प्रोत्साहन राशि (Incentive) भी प्रदान की है।
विभाग की इस भारी सफलता के पीछे ‘माइनिंग डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एंड सर्विलांस सिस्टम’ और ‘ई-रवन्ना सिक्योरिटी पेपर प्रोजेक्ट’ जैसी आधुनिक तकनीक का बड़ा हाथ है। विशेष रूप से राज्य के चार प्रमुख मैदानी जिलों में 45 हाई-टेक चेक गेट स्थापित किए गए हैं। इन गेट्स की मदद से अवैध खनन और गैर-कानूनी परिवहन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
विशेष सिक्योरिटी फीचर्स वाले ई-रवन्ना प्रपत्रों के कारण फर्जीवाड़े की गुंजाइश खत्म हो गई है, जिससे राजस्व की लीकेज पूरी तरह बंद हुई है।
प्रशासनिक स्तर पर खनिज नीति और नियमावली को सरल बनाना राज्य के लिए गेम-चेंजर साबित हुआ है। राजपाल लेघा के अनुसार, नियमों के सरलीकरण से जहां एक ओर पारदर्शी तरीके से पट्टों का आवंटन संभव हुआ, वहीं दूसरी ओर वैध खनन को प्रोत्साहन मिला। वर्तमान में सख्त भंडारण नियमों और परिवहन जांच के कारण ही विभाग अपने पुराने रिकॉर्ड तोड़ने में सफल रहा है।









