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उत्तराखंड में भूमाफियाओं पर सर्जिकल स्ट्राइक, गढ़वाल कमिश्नर ने एक झटके में निपटाए 51 केस

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देहरादून, 06 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति को धरातल पर उतारते हुए गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडेय ने भूमाफियाओं और लापरवाह अफसरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को सर्वे चौक स्थित कैंप कार्यालय में आयोजित लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की मैराथन बैठक में कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि जमीन की धोखाधड़ी करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

बैठक का माहौल तब तनावपूर्ण हो गया जब आयुक्त ने उप जिलाधिकारी (एसडीएम) सदर और ऋषिकेश की अनुपस्थिति पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने तुरंत दोनों अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब करने के आदेश दिए। इतना ही नहीं, ऋषिकेश के तहसीलदार द्वारा अधूरी जानकारी देने पर कमिश्नर ने उन्हें बैठक के बीच से ही ऋषिकेश रवाना किया और एक घंटे के भीतर पूरी फाइल के साथ रिपोर्ट पेश करने का अल्टीमेटम दे दिया।

गढ़वाल मंडल में जमीनों के खेल को उजागर करते हुए कमिश्नर ने कुल 170 लंबित मामलों में से 77 पर सुनवाई पूरी की। इसमें से 51 शिकायतों का पूरी तरह निस्तारण कर दिया गया, जबकि धोखाधड़ी के पुख्ता प्रमाण मिलने पर 5 मामलों में पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया है। आयुक्त ने पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल को निर्देशित किया कि सरकारी भूमि पर कब्जे के हर मामले में अनिवार्य रूप से मुकदमा दर्ज हो।

एक चौंकाने वाले खुलासे में राजस्थान के कुछ निवासियों द्वारा रुद्रप्रयाग में आवासीय उपयोग के लिए खरीदी गई जमीन पर नियमों के विरुद्ध होटल बनाने का मामला सामने आया। कमिश्नर ने उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम की धारा-154 के उल्लंघन पर इस जमीन को तत्काल राज्य सरकार में निहित करने के निर्देश दिए। दोषियों के खिलाफ धारा 166 और 167 के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

जांच में यह भी पाया गया कि शातिर भूमाफिया एक ही खसरा नंबर की जमीन को दो अलग-अलग खरीदारों को बेच रहे थे। देहराखास के एक ऐसे ही मामले में विधिक राय के बाद तत्काल एफआईआर दर्ज की गई है। कमिश्नर ने साफ कहा कि जहां भी गड़बड़ी साफ दिख रही है, वहां पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) से जांच कराई जाएगी ताकि सफेदपोशों के चेहरे बेनकाब हो सकें।

आयुक्त ने सख्त हिदायत दी है कि जिन मामलों में संयुक्त निरीक्षण की जरूरत है, उन्हें एक हफ्ते के भीतर निपटाकर रिपोर्ट सौंपी जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में तहसील स्तर की रिपोर्ट में कोई त्रुटि पाई गई, तो संबंधित राजस्व अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी। अगले 15 दिनों के भीतर दोबारा समीक्षा बैठक बुलाई गई है ताकि शेष 93 मामलों को भी निर्णायक मोड़ तक पहुंचाया जा सके।

इस उच्चस्तरीय बैठक में आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, अपर आयुक्त उत्तम सिंह चौहान और कई तहसीलों के एसडीएम मौजूद रहे। प्रशासन के इस कड़े रुख से साफ है कि अब देहरादून और ऋषिकेश जैसे हॉटस्पॉट इलाकों में जमीन की रजिस्ट्री के नाम पर जनता को ठगने वाले गिरोहों के बुरे दिन शुरू हो गए हैं।

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