देहरादून, 07 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड के हजारों प्रांतीय रक्षक दल (PRD) जवानों के लिए चैत्र नवरात्रि और नए वित्त वर्ष का आगाज बड़ी सौगात लेकर आया है। पुष्कर सिंह धामी सरकार ने पीआरडी स्वयंसेवकों की बरसों पुरानी मांग को स्वीकार करते हुए उन्हें साल के 365 दिन अनिवार्य रोजगार देने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।
सोमवार को सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री रेखा आर्या ने जवानों के प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि अब उनकी ड्यूटी केवल कुछ महीनों तक सीमित नहीं रहेगी। सरकार अब होमगार्ड की तर्ज पर पीआरडी जवानों को भी मानदेय और महंगाई भत्ता (DA) देने का प्रस्ताव तैयार कर रही है। इस निर्णय के बाद पिछले 18 मार्च से अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे जवानों ने आंदोलन स्थगित करने पर अपनी सहमति दे दी है।
विभागीय मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पीआरडी जवानों की मांगों से संबंधित औपचारिक प्रस्ताव जल्द से जल्द कैबिनेट की मेज पर रखा जाए। फिलहाल इन जवानों को प्रतिदिन करीब 500 रुपये मानदेय मिलता है, लेकिन छुट्टियों और ड्यूटी न मिलने के कारण उनकी मासिक आय काफी कम रहती थी। अब होमगार्ड के समान करीब 600 रुपये प्रतिदिन और पुलिस के न्यूनतम वेतन के अनुपात में भत्ते मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति में आमूलचूल बदलाव आएगा।
इतिहास गवाह है कि साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उत्तराखंड में होमगार्ड का वेतन तो बढ़ा था, लेकिन पीआरडी जवान तब से ही अपनी उपेक्षा का आरोप लगा रहे थे। इस बैठक में विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा और खेल निदेशक आशीष चौहान की मौजूदगी में यह तय हुआ कि जवानों को बीमारी की हालत में भी आर्थिक सहायता का दायरा बढ़ाया जाएगा।
हालिया सुधारों के तहत ड्यूटी के दौरान सामान्य मृत्यु पर मिलने वाली सहायता राशि को भी 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया जा चुका है।
दूसरी तरफ, उत्तराखंड को खेलों की नर्सरी बनाने के संकल्प के साथ प्रस्तावित खेल विश्वविद्यालय पर भी बड़ा अपडेट सामने आया है। मंत्री रेखा आर्या ने विश्वविद्यालय में इसी शैक्षणिक सत्र से पढ़ाई शुरू करने के लिए 142 नए पदों के सृजन को मंजूरी दे दी है। भूमि विवाद के मामलों को प्राथमिकता पर निपटाने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य के प्रतिभावान खिलाड़ियों को अब सिस्टम की सुस्ती का शिकार नहीं होना पड़ेगा।
सरकार ने यह भी साफ किया है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले प्रदेश के खिलाड़ियों को ‘आउट ऑफ टर्न’ नियुक्ति देने की फाइल अब धूल नहीं फांकेगी। खेल विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि भर्ती प्रक्रियाओं में तेजी लाकर मेडल लाने वाले युवाओं को सीधे सरकारी नौकरी से जोड़ा जाए। इससे न केवल पलायन रुकेगा, बल्कि खेल के क्षेत्र में उत्तराखंड की धाक और मजबूत होगी।









