देहरादून, 13 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में वैश्विक ईंधन संकट और बढ़ती ऊर्जा लागत से निपटने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई क्रांतिकारी बदलावों को मंजूरी दी गई है। राज्य सरकार ने ईंधन खपत कम करने के लिए खुद से शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिले (फ्लीट) में वाहनों की संख्या को तत्काल प्रभाव से आधा करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, प्रदेश में हफ्ते में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ लागू किया जाएगा, जिसमें सरकारी कर्मचारियों और आम जनता को निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
कैबिनेट ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए राज्य की परिवहन व्यवस्था को इलेक्ट्रिक मोड पर ले जाने का लक्ष्य रखा है। नई नीति के तहत अब किसी भी सरकारी विभाग द्वारा वाहनों की खरीद किए जाने पर उसमें 50 प्रतिशत हिस्सेदारी अनिवार्य रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की होगी। सरकार ने परिवहन विभाग को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश भर में चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क प्राथमिकता के आधार पर फैलाया जाए ताकि ई-वाहनों के संचालन में कोई बाधा न आए।
अधिकारियों और सरकारी कामकाज के लिए नए नियम
सचिवालय और अन्य विभागों के कामकाज के तरीकों में भी बड़ा फेरबदल किया गया है। जिन अधिकारियों के पास एक से अधिक विभाग की जिम्मेदारी है, वे अब दिनभर में केवल एक ही सरकारी वाहन का उपयोग कर सकेंगे। ईंधन बचाने के लिए बैठकों को फिजिकल के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए करने पर जोर दिया जाएगा। निजी क्षेत्र को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है कि वे अपने कर्मचारियों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ की सुविधा दें।
आर्थिक और जीवनशैली में बदलाव की अपील
कैबिनेट बैठक में केवल ऊर्जा ही नहीं, बल्कि आर्थिक बचत को लेकर भी चौंकाने वाले सुझाव सामने आए हैं। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे कम से कम एक साल तक सोने (Gold) की खरीद को सीमित रखें ताकि विदेशी मुद्रा और आयात के दबाव को कम किया जा सके। इसके अलावा, स्वास्थ्य और बचत को जोड़ते हुए स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी कैंटीनों में खाद्य तेल के उपयोग की समीक्षा करने और उसे कम करने के निर्देश दिए गए हैं।
ऊर्जा और कृषि क्षेत्र में दीर्घकालिक सुधार
राज्य में रसोई गैस की निर्भरता कम करने के लिए पीएनजी (Piped Natural Gas) कनेक्शनों को मिशन मोड में लगाया जाएगा। खासकर होटल, रेस्टोरेंट और सरकारी आवासों में इसे प्राथमिकता दी जाएगी। ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना’ के तहत रूफ टॉप सोलर को बढ़ावा देने और ग्राम्य विकास विभाग के जरिए गोबर गैस संयंत्रों के विस्तार पर भी जोर दिया गया है। कृषि क्षेत्र में रासायनिक उर्वरकों के बोझ को कम करने के लिए किसानों को जीरो बजट और प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
पर्यटन और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा
प्रदेश की आर्थिकी को मजबूत करने के लिए ‘विजिट माई स्टेट’ अभियान शुरू किया जाएगा, जिसका उद्देश्य घरेलू पर्यटन को बढ़ाना है। सरकार डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस की व्यवस्था करेगी। साथ ही, ‘मेड इन स्टेट’ अभियान के तहत स्थानीय उत्पादों की बिक्री अनिवार्य करने और सरकारी खरीद में ‘मेक इन इंडिया’ नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्णय लिया गया है।
मुख्यमंत्री का बयान: “रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भारी दबाव है। प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर उत्तराखंड ने व्यवहारिक बदलावों के जरिए राष्ट्रीय प्रयासों में सहयोग करने का फैसला किया है।”









