देहरादून, 18 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में लव जिहाद, लैंड जिहाद, धर्मांतरण और अवैध धार्मिक निर्माण के मुद्दों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल चरम पर पहुंच गई है। राजधानी देहरादून से लेकर तराई के जिलों तक इन विषयों पर हिंदूवादी संगठनों के सड़क पर उतरने और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कड़े बयानों के बाद राज्य का माहौल गरमा गया है।
जहां एक तरफ सरकार इन कार्रवाइयों को देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान और जनसांख्यिकी को बचाने की कवायद बता रही है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इसे महंगाई और बेरोजगारी जैसे असल मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की राजनीति करार दे रहा है।
जबरन धर्मांतरण पर जेल भेजेंगे: मुख्यमंत्री
उधम सिंह नगर जिले के सितारगंज में थारू राणा और बुक्सा जनजाति बहुल क्षेत्र में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने धर्मांतरण के मुद्दे पर बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि देवभूमि की मूल संस्कृति और जनजातीय पहचान से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री धामी ने सार्वजनिक मंच से चेतावनी देते हुए कहा:
“उत्तराखंड में जबरन या किसी भी तरह का प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने वालों को बिल्कुल भी बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे कृत्य में शामिल लोगों की सही जगह जेल की सलाखों के पीछे है। हमने प्रदेश में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून इसीलिए लागू किया है ताकि हमारी सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहे।”
मुख्यमंत्री ने महाराणा प्रताप का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति के संरक्षकों के वंशज अपनी जड़ों से जुड़े रहें, यह सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने ‘थूक जिहाद’ और ‘लव जिहाद’ के खिलाफ सख्त रुख दोहराते हुए कहा कि सरकारी जमीनों पर ‘हरि और नीली चादर’ डालकर कब्जा करने के प्रयासों को नाकाम किया गया है, जिसके तहत अब तक 12 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है। तराई क्षेत्र में ईसाई मिशनरियों की कथित गतिविधियों की रिपोर्ट के बाद स्थानीय प्रशासन को एलर्ट पर रखा गया है।
हरिद्वार: नोटिस के बाद मस्जिद की मीनारें हटाने का काम शुरू
धार्मिक स्थलों के अवैध निर्माण पर चल रही प्रशासनिक सख्ती के बीच हरिद्वार जिले की सुल्तानपुर नगर पंचायत से बड़ा अपडेट सामने आया है। यहां मानकों और तय अनुमति प्रक्रिया का उल्लंघन कर बनाई जा रही एक मस्जिद की ऊंची मीनारों को मस्जिद प्रबंधन ने खुद ही हटाना शुरू कर दिया है।
हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर शिकायतें मिलने के बाद प्रशासन ने इस निर्माण का संज्ञान लिया था। शुरुआती जांच में सामने आया कि उत्तराखंड की सबसे बड़ी मस्जिद के रूप में प्रचारित किए जा रहे इस परिसर के निर्माण के लिए न तो जिला प्रशासन और न ही विकास प्राधिकरण से कोई अनुमति ली गई थी।
प्रशासन द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद भी जब तय समय सीमा में जवाब नहीं मिला, तो उपजिलाधिकारी (SDM) के नेतृत्व में एक टीम ने मौके पर पहुंचकर परिसर को सील करने की अंतिम चेतावनी दी। इसके बाद मस्जिद प्रबंधन ने स्वेच्छा से ऊंची मीनारों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
गदरपुर: धर्म परिवर्तन के बाद SC प्रमाण पत्र निरस्त करने की संस्तुति
एक अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक घटनाक्रम में उधम सिंह नगर के गदरपुर क्षेत्र में धर्म परिवर्तन से जुड़े मामले में कड़ी कानूनी कार्रवाई की गई है। ग्राम मजारशीला निवासी अरविंद सैनी की शिकायत पर प्रशासन ने गांव में अवैध रूप से संचालित चर्च और धर्मांतरण के आरोपों की जांच शुरू की थी।
उप जिलाधिकारी ऋचा सिंह के अनुसार, संयुक्त जांच रिपोर्ट में शिकायत के पक्ष में अहम तथ्य और सोशल मीडिया पर संबंधित व्यक्ति की संदिग्ध गतिविधियां पाई गईं। इसके बाद साल 2019 में जारी किए गए संबंधित व्यक्ति के अनुसूचित जाति (SC) प्रमाण पत्र को निरस्त करने की संस्तुति जिला स्क्रूटनी समिति को भेज दी गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश 1950 और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व दिशा-निर्देशों के तहत की जा रही है।
देहरादून में दक्षिणपंथी संगठनों का प्रदर्शन
इससे पहले देहरादून में दक्षिणपंथी संगठनों ने जनसांख्यिकीय संतुलन बदलने के खिलाफ सड़कों पर उतरकर भारी विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने ‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ के विरोध में नारेबाजी की, जिसके कारण शहर के कई प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लग गया और राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। संगठनों की मांग है कि राज्य सरकार को इन संवेदनशील मामलों में और अधिक दंडात्मक रुख अपनाना चाहिए।
कांग्रेस का पलटवार: ध्रुवीकरण का आरोप
इन तमाम प्रशासनिक कदमों और बयानों पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए धार्मिक ध्रुवीकरण का सहारा ले रही है।
गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा:
“उत्तराखंड सरकार के पास जनता को बताने के लिए विकास, रोजगार या बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा कोई काम नहीं है। जब खुद सूबे के मुख्यमंत्री ‘लव जिहाद’ और ‘थूक जिहाद’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, तो इससे कुछ संगठनों का मनोबल बढ़ता है और समाज में अनावश्यक तनाव पैदा होता है। उत्तर प्रदेश की तरह यहां भी उग्र गतिविधियों पर लगाम लगनी चाहिए। यह सिर्फ महंगाई और बेरोजगारी से ध्यान भटकाने की सुनियोजित राजनीति है।”
निकट भविष्य में होने वाले स्थानीय और सांगठनिक विमर्शों के चलते उत्तराखंड की राजनीति में पहचान, भूमि संरक्षण और धर्मांतरण के मुद्दों पर चल रहा यह घमासान आने वाले दिनों में और अधिक तेज होने के आसार हैं।









