देहरादून, 25 मई (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में पिछले डेढ़ दशक के भीतर जनसांख्यिकी और आवासीय ढांचे में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। हाल ही में संपन्न हुई भवन गणना के प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की आबादी में 26 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
वहीं, संयुक्त परिवारों की परंपरा कमजोर पड़ने से परिवारों की संख्या 40 प्रतिशत तक बढ़ गई है। इसके समानांतर, निर्वाचन आयोग ने राज्य में मतदाता सूचियों को त्रुटिहीन बनाने के लिए विशेष अभियान (SIR) की कमान संभाल ली है।
24 अप्रैल से शुरू होकर रविवार को समाप्त हुई भवन गणना के आंकड़े राज्य में बढ़ते शहरीकरण और आबादी के दबाव को स्पष्ट करते हैं। 2011 में प्रदेश की जनसंख्या लगभग 1.01 करोड़ थी, जो वर्तमान में बढ़कर 1.27 करोड़ के पार जा चुकी है।
तेजी से बढ़ रहा एकल परिवारों का ग्राफ
आंकड़ों के अनुसार, राज्य में मकानों की संख्या 33.8 लाख से बढ़कर 45 लाख हो गई है। पिछले 15 सालों में करीब 11.2 लाख नए मकान बने हैं। यह रियल एस्टेट सेक्टर में आए उछाल और नई कॉलोनियों के बसने का सीधा परिणाम है।
इसके अलावा, 2011 में दर्ज 20 लाख परिवारों की तुलना में अब यह आंकड़ा 28.3 लाख तक पहुंच गया है। प्रदेश में 8.18 लाख नए परिवारों का अस्तित्व में आना यह बताता है कि मैदानी और शहरी क्षेत्रों में एकल परिवार (न्यूक्लियर फैमिली) का चलन तेजी से बढ़ा है।
जनगणना निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि 32 हजार से अधिक कर्मचारियों ने एक महीने तक घर-घर जाकर यह सर्वे पूरा किया है। राज्य को 29 हजार हिस्सों में बांटकर यह प्रक्रिया पूरी की गई। इसके अंतिम और विस्तृत आंकड़े केंद्र सरकार द्वारा जारी किए जाएंगे, जिसके बाद मुख्य जनगणना का काम शुरू होगा।
वोटर लिस्ट से हटेंगे अनुपस्थित और मृत मतदाताओं के नाम
जनसंख्या के इन नए आंकड़ों के बीच, चुनाव आयोग ने मतदाता सूचियों को अपडेट करने की मुहिम भी तेज कर दी है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने देहरादून स्थित बीजापुर राज्य अतिथि गृह में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) तैयारियों की समीक्षा की। इस बैठक में मुख्य सचिव आनंदबर्द्धन भी मौजूद रहे।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का मुख्य लक्ष्य मतदाता सूची से मृत, शिफ्ट हो चुके, दोहरी प्रविष्टि वाले और अनुपस्थित मतदाताओं के नाम हटाकर उसे पूरी तरह से पारदर्शी बनाना है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की है कि वे बीएलओ (Booth Level Officer) को सहयोग करें और अपना नया फोटो उपलब्ध कराएं।
90 फीसदी मैपिंग का काम पूरा
उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने प्रस्तुतीकरण देते हुए बताया कि प्रदेश में ‘प्री-एसआईआर’ चरण की 89% मैपिंग पूरी हो चुकी है। जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ), डिप्टी डीईओ और ईआरओ के पहले चरण की ट्रेनिंग भी संपन्न हो गई है।
वर्तमान में बीएलओ और अन्य फील्ड स्टाफ को प्रशिक्षित किया जा रहा है। पारदर्शी प्रक्रिया के लिए सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ हर हफ्ते बैठक करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।









