देहरादून, 29 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में जंगलों की आग अब बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। पहाड़ों से शुरू हुई यह तबाही अब मैदानी जिलों में भी भारी नुकसान कर रही है। वनाग्नि के ताजा आंकड़ों में देहरादून जिला, चमोली को पीछे छोड़ते हुए राज्य में सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र बन गया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। अब जंगलों की आग बुझाने में सहयोग नहीं करने वालों के खिलाफ सीधे मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
इस सीजन के महज सौ दिनों के भीतर प्रदेश में वनाग्नि की 460 से अधिक घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें लगभग 380 हेक्टेयर वन संपदा जलकर खाक हो गई है। चमोली जिले में जंगल की आग के कारण अब तक दो लोगों की जान भी जा चुकी है।
मदद नहीं की तो एक साल की जेल
वनाग्नि की रोकथाम के लिए वन विभाग अब कड़े कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल करने जा रहा है। बदरीनाथ-केदारनाथ के डीएफओ एसके दुबे ने स्पष्ट किया है कि वन उपज लेने वाले, लकड़ी काटने की अनुमति प्राप्त लोग, मवेशी चराने वाले और वन क्षेत्र के आस-पास रहने वाले ग्रामीण इस नियम के दायरे में आएंगे।
संशोधित वन अधिनियम (2001) के तहत, यदि कोई व्यक्ति जंगल की आग बुझाने में मदद नहीं करता है या दोषी पाया जाता है, तो उसे एक वर्ष तक की जेल, दो हजार रुपये जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है। राज्य बनने के बाद से अब तक इस कड़े नियम के तहत कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ था, लेकिन अब विभाग ने एफआईआर की तैयारी कर ली है।
देहरादून और चमोली में सबसे ज्यादा नुकसान
आंकड़ों के अनुसार, देहरादून जिले के चार डिवीजनों में अब तक 74 हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं। इसमें कालसी डिवीजन सबसे बुरी तरह प्रभावित है, जहां 37 हेक्टेयर वन क्षेत्र खाक हो गया। इसके अलावा दून डिवीजन में 7, मसूरी में 6 और चकराता में 24 हेक्टेयर जंगल जले हैं।
वहीं, चमोली जिले में 68 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुए हैं। यहां बद्रीनाथ वन प्रभाग में 47 और अलकनंदा सॉयल कंजर्वेशन प्रभाग में 21 हेक्टेयर वन संपदा जली है।
त्यूणी में सेब के बगीचे राख
पहाड़ में गर्मी और तेज हवाओं के कारण आग रिहायशी और कृषि क्षेत्रों तक पहुंच रही है। त्यूणी तहसील क्षेत्र में आरक्षित और सिविल वनों से भड़की आग ने किसानों के बाग-बगीचों को भारी नुकसान पहुंचाया है। यहां सैकड़ों सेब के पेड़ जल गए। चकराता वन प्रभाग के देवघार रेंज (मझोग और संग्रेड बीट) में अलग-अलग जगह लगी आग पर वन विभाग, अग्निशमन और ग्रामीणों ने कई घंटों की मशक्कत के बाद काबू पाया।
डीएफओ चकराता वैभव कुमार के अनुसार, देवघर रेंज में जरासू पानी के सिविल क्षेत्र से शुरू हुई आग हवाओं के कारण आरक्षित वन तक फैल गई थी, जिसमें करीब साढ़े सात हेक्टेयर जंगल जले। वनकर्मियों ने 12 घंटे की मेहनत के बाद करीब 428 हेक्टेयर जंगल को बचा लिया। इस मामले में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
शहरी क्षेत्रों में भी आग का तांडव और हाई अलर्ट
उत्तरकाशी जिले में भी वरुणावत पर्वत पर ज्ञानसू के ऊपर बाड़ाहाट रेंज में आग लगातार धधक रही है, जबकि नौगांव ब्लॉक के भाटिया के जंगल भी तीन दिन से जल रहे हैं। वहीं, देहरादून शहर में भी दमकल विभाग को एक ही दिन में आग की आठ घटनाओं से जूझना पड़ा। इनमें सहस्रधारा रोड और प्रेमनगर के जंगल, मोतीनगर व बसंत विहार में ट्रांसफॉर्मर, और रेसकोर्स व गांधी पार्क की दुकानों में आग लगने की घटनाएं शामिल हैं।
सीसीएफ (वनाग्नि) सुशांत पटनायक ने बताया कि बढ़ते तापमान, बारिश की कमी, सूखी वनस्पति और तेज हवाओं के चलते आग तेजी से फैल रही है। कई इलाके दुर्गम होने के कारण आग बुझाने में भारी चुनौती आ रही है। स्थिति को देखते हुए पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त टीमें तैनात की गई हैं और स्थानीय लोगों से लगातार सहयोग की अपील की जा रही है।
| जिला | प्रभावित वन क्षेत्र (हेक्टेयर) |
| देहरादून | 74.00 |
| चमोली | 68.00 |
| पौड़ी | 58.75 |
| रुद्रप्रयाग | 48.62 |
| टिहरी | 42.20 |
| पिथौरागढ़ | 35.75 |
| नैनीताल | 19.05 |
| उत्तरकाशी | 16.65 |
| चंपावत | 6.05 |
| बागेश्वर | 5.30 |
| अल्मोड़ा | 3.60 |









