रुद्रप्रयाग, 29 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में बढ़ती भीड़ और लंबी कतारों की समस्या को देखते हुए दर्शन व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू कर दी है, जिसके तहत अब ‘सुगम दर्शन’ चाहने वाले श्रद्धालुओं को 1100 रुपये का शुल्क चुकाना होगा। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य धाम में वीआईपी कल्चर को खत्म कर व्यवस्था को पारदर्शी और सुचारू बनाना है।
नई व्यवस्था के लागू होने के बाद धाम में किसी भी पद या रसूख के आधार पर सीधे प्रवेश नहीं मिलेगा। बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने स्पष्ट किया है कि यात्रा को सुरक्षित, समयबद्ध और अधिक सुव्यवस्थित बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। अब चाहे कोई मंत्री हो, अधिकारी या कोई खास व्यक्ति, सुगम दर्शन के लिए सभी को अनिवार्य रूप से नियम के तहत पर्ची कटवानी होगी।
इस नई एसओपी का असर सिर्फ आम यात्रियों पर ही नहीं, बल्कि धाम के पंडा-पुरोहितों और उनके यजमानों पर भी पड़ने जा रहा है। पुरानी परंपरागत व्यवस्थाओं से इतर, अब यजमानों को भी मंदिर में प्रवेश के लिए तय प्रक्रिया और शुल्क आधारित व्यवस्था से गुजरना होगा। प्रशासन इसे भीड़ प्रबंधन और वीआईपी दबाव को कम करने के लिए एक ‘कड़े नियंत्रण’ के रूप में देख रहा है।
लगातार खराब हो रहे मौसम और कड़ाके की ठंड के बीच घंटों लाइन में लगने से सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और बीमार यात्रियों को होती थी। सुगम दर्शन की इस सशुल्क व्यवस्था से ऐसे लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है जो लंबी लाइन में खड़े होने में असमर्थ हैं।
हालांकि, इस फैसले को लेकर श्रद्धालुओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। सोशल मीडिया और धाम में मौजूद यात्रियों का एक वर्ग इसे बेहतर क्राउड मैनेजमेंट और सुरक्षित यात्रा की दिशा में सकारात्मक कदम मान रहा है। वहीं, दूसरा वर्ग इसे आस्था के नाम पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताकर फैसले पर सवाल उठा रहा है।









