देहरादून, 10 जून (दून हॉराइज़न)। नरेंद्रनगर पालिका चुनाव के दौरान प्रदेश के निर्वाचन मंत्री सुबोध उनियाल और एक महिला के बीच पोलिंग बूथ पर हुई तीखी नोकझोंक का मामला अब राजनीतिक और सामाजिक रूप ले चुका है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद जहां एक तरफ बहस छिड़ी है, वहीं अब इस मामले में खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार समेत कई जनप्रतिनिधि मंत्री के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं।
खानपुर विधायक उमेश कुमार ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि आजकल राजनीति और सोशल मीडिया पर एक बेहद खतरनाक चलन शुरू हो गया है। इस नए ट्रेंड के तहत लोग कैमरा खोलकर सीधे बड़े नेताओं को उकसाते हैं ताकि उनकी तीखी प्रतिक्रिया रिकॉर्ड कर टीआरपी बटोरी जा सके।
उमेश कुमार के मुताबिक, किसी भी लोकप्रिय नेता को जानबूझकर टारगेट करना और फिर उसकी त्वरित प्रतिक्रिया को मुख्य मुद्दा बना देना लोकतांत्रिक विरोध की श्रेणी में नहीं आता, बल्कि यह विशुद्ध रूप से राजनीतिक स्टंट है।
विधायक ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सुधार के लिए तय प्रक्रियाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी मंत्री, विधायक या जनप्रतिनिधि से कोई गलती हुई भी है, तो उसके लिए देश का कानून, चुनाव आयोग और पूरी न्यायिक व्यवस्था काम कर रही है। मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि दोष साबित हो तो कार्रवाई भी की जानी चाहिए।
लेकिन किसी व्यक्ति को सोचे-समझे प्लान के तहत कैमरे के सामने उकसाकर उसकी मर्यादा को ठेस पहुंचाना किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता।
नरेंद्रनगर के स्थानीय लोगों और राजनीतिक विश्लेषकों ने भी इस घटना के बाद कुछ गंभीर प्रशासनिक सवाल उठाए हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि संबंधित महिला नरेंद्रनगर क्षेत्र की पंजीकृत मतदाता नहीं थीं, तो वह मतदान प्रक्रिया के दौरान पोलिंग बूथ के भीतर किस तरह दाखिल हुईं।
स्थानीय नागरिकों ने निर्वाचन विभाग के अधिकारियों से मांग की है कि मतदान केंद्र के भीतर बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ की जाए ताकि असल सच्चाई सामने आ सके।
सोशल मीडिया पर भी सुबोध उनियाल के पक्ष में लोग लगातार अपनी राय साझा कर रहे हैं। समर्थकों का तर्क है कि सुबोध उनियाल उत्तराखंड के उन चुनिंदा नेताओं में से हैं, जिनसे मिलने के लिए आम जनता को महीनों इंतजार नहीं करना पड़ता। वे सचिवालय से लेकर अपने निजी आवास तक हमेशा जनता की समस्याओं के लिए उपलब्ध रहते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दशकों के सार्वजनिक जीवन और जनता के बीच किए गए कार्यों का मूल्यांकन किसी एक छोटे से वीडियो क्लिप या क्षणिक गुस्से के आधार पर नहीं किया जा सकता।









