पिथौरागढ़, 11 जून (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के धारचूला क्षेत्र में रेबीज संक्रमण का एक और बेहद गंभीर मामला सामने आया है। धारचूला तहसील के जुम्मा गांव में रहने वाले आठवीं कक्षा के एक 14 वर्षीय छात्र में रेबीज के एडवांस लक्षण दिखाई देने के बाद उसे अत्यंत गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत हायर सेंटर रेफर कर दिया है।
चिकित्सकों के मुताबिक, इस किशोर में पानी और हवा से डरने (हाइड्रोफोबिया और एयरोफोबिया) के साथ-साथ मुंह से लार निकलने जैसे स्पष्ट लक्षण देखे गए हैं। चिंता की बात यह है कि इसी जुम्मा गांव में बीते 23 मई को एक अन्य किशोर मोहित धामी की भी रेबीज के चलते मौत हो चुकी है। इन दोनों ही बच्चों को करीब तीन महीने पहले गांव के ही एक आवारा कुत्ते के पिल्ले ने काटा था।
उपचार में देरी बनी बड़ी लापरवाही
प्रशासनिक और चिकित्सा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जुम्मा गांव के तोक बुंगा निवासी युवराज सिंह धामी (14) पुत्र रवीन्द्र धामी को बीती 28 फरवरी को एक लावारिस कुत्ते ने काटकर जख्मी कर दिया था। परिजनों ने शुरुआत में इस घटना को गंभीरता से नहीं लिया और बच्चे का उचित चिकित्सीय उपचार नहीं कराया।
जब इसी मई महीने में गांव के दूसरे पीड़ित मोहित धामी में रेबीज के लक्षण उभरे और उसकी मौत हो गई, तब जाकर परिजनों की नींद टूटी। मोहित की मौत के बाद आनन-फानन में 26 मई को युवराज को एंटी रेबीज वैक्सीन (ARV) की पहली डोज दी गई। हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि कुत्ता काटने के लगभग तीन महीने बाद टीका लगाने के कारण शरीर में वायरस फैल चुका था और वैक्सीन का कोई अपेक्षित लाभ छात्र को नहीं मिल पाया।
डॉक्टरों ने पुष्ट किए लक्षण, गांव में दहशत
बुधवार सुबह अचानक युवराज की तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल के आपातकालीन वार्ड पहुंचे। वहां तैनात डॉक्टर आशु अवस्थी ने छात्र का परीक्षण किया। डॉ. अवस्थी के अनुसार, किशोर की स्थिति काफी गंभीर है और उसमें रेबीज के पारंपरिक लक्षण पूरी तरह उभर चुके हैं। स्थानीय स्तर पर स्थिति नियंत्रण से बाहर होने के कारण उसे विशेषज्ञ इलाज के लिए तुरंत बड़े अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, जिस लावारिस कुत्ते के पिल्ले ने मोहित और युवराज को काटा था, उसने गांव के कम से कम पांच अन्य लोगों को भी काटकर घायल किया था। राहत की बात यह है कि बाकी लोगों को समय पर टीके लग चुके हैं, लेकिन इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। बताया गया है कि उक्त पिल्ले की भी करीब तीन महीने पहले ही मौत हो गई थी।









