Uttarakhand News : कर्णप्रयाग उपजिलाधिकारी व परगना मजिस्ट्रेट अलकेश नौडियाल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा-163 के तहत इलाके में सख्त निषेधाज्ञा थोप दी है। 20 जून शाम 7 बजे से लागू यह आदेश 27 जून 2026 तक पूरे परगना क्षेत्र में प्रभावी रहेगा।
शनिवार 20 जून को रुद्रप्रयाग जनपद के नगरासू गुरुद्वारे में अचानक भारी हंगामा खड़ा हो गया। पारंपरिक वेशभूषा में कई निहंग श्रद्धालु छत पर चढ़ गए। वे खुलेआम अपने पारंपरिक शस्त्रों का प्रदर्शन करने लगे।
हालात बेकाबू होने की आशंका के चलते स्थानीय पुलिस और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की भारी फोर्स ने इलाके की घेराबंदी कर ली। जवानों ने मोर्चा संभालते हुए निहंग श्रद्धालुओं से संवाद स्थापित किया और उन्हें शांतिपूर्वक नीचे उतरने पर राजी किया।
गुरुद्वारा परिसर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा चक्र अभेद्य कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। किसी भी तरह की जनहानि या नई हिंसा की कोई सूचना नहीं है।
छत पर शस्त्र लहराते निहंगों के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं। खुफिया एजेंसियां हर एक फुटेज की तफ्तीश कर रही हैं। अफवाह फैलाने वालों की धरपकड़ के लिए साइबर सेल की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
विभिन्न संगठनों ने हाल ही में कर्णप्रयाग कूच का आह्वान किया था। परगना क्षेत्र में अब जुलूस, धरना, रैली और जनसभाओं के आयोजन पर पूर्ण पाबंदी लगा दी गई है। ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारियों को इस प्रतिबंध से मुक्त रखा गया है।
सार्वजनिक आयोजनों में ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग पूरी तरह बैन है। लाठी, तलवार, चाकू, भाला, आग्नेयास्त्र, पेट्रोल, तेजाब या पटाखे लेकर चलने पर सीधे विधिक कार्रवाई होगी। ईंट-पत्थर इकट्ठा करने वालों को भी कतई बख्शा नहीं जाएगा।
निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने वालों को पुलिस बिना वारंट गिरफ्तार करेगी। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता-2023 की धारा-223 के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें हवालात भेजा जाएगा। यातायात और सरकारी कार्यों में बाधा डालने वालों पर भी डंडा चलेगा।
बीती 16 जून को कर्णप्रयाग बाजार में निहंग सिख यात्रियों और स्थानीय दुकानदारों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। निहंगों की तरफ से सरेआम चली तलवारों की चपेट में आकर कई स्थानीय नागरिक लहूलुहान हो गए थे। बाजार में बढ़ते तनाव को देखते हुए ही प्रशासन ने यह सख्त रुख अपनाया है।
उत्तराखंड सरकार ने हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान घटी इस घटना पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। गृह सचिव शैलेश बगौली ने इसे दो गुटों के बीच महज एक भावनात्मक प्रतिक्रिया करार दिया है। इसे धार्मिक विवाद मानने से शासन ने साफ इनकार किया है।
मामले को सांप्रदायिक एंगल देने की कोशिश करने वालों को शासन स्तर से खुली चेतावनी दी गई है। राज्य में मेलजोल और शांति के माहौल को बिगाड़ने वालों पर सीधे पुलिसिया कार्रवाई का फरमान जारी हुआ है।
गढ़वाल आईजी को घटना की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के सख्त निर्देश सौंपे गए हैं। सभी पक्षों को सुनने के बाद ठोस तथ्यों के आधार पर ही अगली कार्रवाई तय होगी। लॉ एंड ऑर्डर एडीजी से पूरे घटनाक्रम की एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट तत्काल तलब की गई है।









