देहरादून, 24 जून, 2026 (दून हॉराइज़न)।
Dehradun Teacher Protest : उत्तराखंड की शासकीय व्यवस्था को हिलाते हुए राजकीय एलटी समायोजित पदोन्नत शिक्षक संघर्ष मंच ने आर-पार की जंग का बिगुल फूंक दिया है। मंच के अध्यक्ष दिगंबर फुलैरिया ने अल्टीमेटम दिया है कि शासन ने जायज मांगें नहीं मानीं तो 25 जून से तमाम शिक्षक सामूहिक आमरण अनशन पर बैठ जाएंगे। राजधानी में इस बड़े आंदोलन को राजकीय शिक्षक संघ और कार्मिक एकता मंच ने बिना शर्त अपना खुला समर्थन देने की घोषणा की है।
शिक्षा महकमे में मचे इस घमासान के बीच मंगलवार से शुरू हुए क्रमिक अनशन में कुमाऊं मंडल के पांच शिक्षक अपनी जिद पर डटे हुए हैं। इन एलटी समायोजित शिक्षकों का सीधा गुस्सा बेसिक शिक्षा विभाग में की गई पुरानी सेवाओं को वर्तमान सेवाकाल में जोड़ने को लेकर है। वे इसी आधार पर चयन प्रोन्नत वेतनमान (सलेक्शन ग्रेड पे) के लाभ की मांग कर रहे हैं।
सचिवालय कूच के बाद उपजे भारी दबाव के बीच अब 26 जून को मुख्यमंत्री कार्यालय में शिक्षक नेताओं की सूबे के मुखिया के साथ सीधी वार्ता तय हुई है। मुख्य सचिव ने भी आंदोलनकारी नेताओं को दफ्तर बुलाकर सभी 19 सूत्रीय मांगों पर संबंधित विभागों से तत्काल विस्तृत रिपोर्ट तलब करने का भरोसा दिया है। एससी-एसटी शिक्षक एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश राठी ने इस बैठक को सकारात्मक बताते हुए फिलहाल धरने पर बैठे शिक्षकों को आगे की रणनीति समझाई।
इससे पहले परेड मैदान से शुरू हुआ शिक्षकों का आक्रोश दर्शनलाल चौक, घंटाघर, एश्लेहॉल और ग्लोब चौक होते हुए सचिवालय की तरफ बढ़ा। प्रदेश अध्यक्ष जगदीश राठी और महामंत्री सुरेंद्र चंद्र की अगुवाई में सूबे के कोने-कोने से जुटे सैकड़ों शिक्षकों ने इस पूरे वीआईपी रूट की रफ्तार को थाम दिया।
सचिवालय से चंद कदम पहले पुलिस प्रशासन ने भारी बैरिकेडिंग कर इस उग्र हुजूम का रास्ता रोका तो भड़के शिक्षकों ने बीच सड़क पर ही डेरा डाल दिया। सीओ-सिटी और सिटी मजिस्ट्रेट ने प्रदर्शनकारियों को समझाने और सड़क खाली कराने के लिए घंटों एड़ी-चोटी का जोर लगाया। शिक्षक मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव से मौके पर ही आमने-सामने की वार्ता की जिद पर अड़े रहे।
इस बड़े सियासी और प्रशासनिक गतिरोध की जड़ में शिक्षकों की पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली की मुख्य मांग शामिल है। कर्मचारी अपने सुरक्षित भविष्य के लिए पुरानी व्यवस्था को हर हाल में वापस चाहते हैं।
शिक्षकों की लंबी फेहरिस्त में पदोन्नति में आरक्षण लागू करने और टीईटी परीक्षा से पूर्ण छूट देने का पेंच फंसा हुआ है। संगठन पिछले लंबे समय से दबी पड़ी इरशाद हुसैन आयोग की रिपोर्ट को तत्काल सार्वजनिक करने की वकालत कर रहा है।
तबादला नीति में पूरी पारदर्शिता बरतने और किसी भी स्तर पर नाइंसाफी रोकने की मांग को लेकर भी आक्रोश गहराया हुआ है।
बच्चों की छात्रवृत्ति राशि में बढ़ोतरी करने, बैकलॉग के खाली पड़े पदों पर तत्काल नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई है। शिक्षकों के लिए कैशलेस इलाज सुनिश्चित करने वाले गोल्डन कार्ड की खामियों को दूर कर एक बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराना इस मांग पत्र का अहम हिस्सा है।









