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Babita Pandey Missing Case : गंगोत्री से दयारा बुग्याल तक छान मारा, सेना-हेलीकॉप्टर भी फेल

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उत्तरकाशी, 24 जून 2026 (दून हॉराइज़न)।

Babita Pandey Missing Case : दयारा बुग्याल ट्रेक से गायब रामनगर निवासी बबीता पांडे की खोज में अब भालू के संभावित आवासीय क्षेत्रों को खंगाला जा रहा है। नटीण के बेहद दुर्गम और घने जंगलों में पुलिस, वन विभाग, एसडीआरएफ और क्यूआरटी की संयुक्त टीम ने मंगलवार 23 जून को एक बड़ा तलाशी अभियान चलाया। खोजी दल ने जंगल के भीतर संदेहास्पद और पहले से चिन्हित खुदे हुए स्थानों पर पानी डालकर दोबारा खुदाई शुरू की है।

सर्च ऑपरेशन का नेतृत्व सीओ जनक सिंह पंवार और बड़कोट के सीओ चंचल शर्मा कर रहे हैं। जंगलों के बीच बने पानी के टैंकों के भीतर भी सघन जांच की गई है। जमीनी स्तर पर चल रहे इस व्यापक सर्च ऑपरेशन के साथ-साथ पुलिस तकनीकी साक्ष्यों को भी जुटाने में लगी है। दयारा ट्रेक के बाईं ओर का यह पूरा हिस्सा जंगली जानवरों का गढ़ माना जाता है।

बबीता पांडे अपने दो साथियों के साथ उत्तरकाशी घूमने आई थी। हर्षिल के लामा टॉप और गंगोत्री धाम के दर्शन करने के बाद तीनों ट्रेकर समुद्र तल से 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित दयारा बुग्याल पहुंचे थे। वहां वे गोई कैंप में ठहरे हुए थे। 29 मई 2026 की रात करीब 11 बजे बबीता अपने टेंट से बाहर निकली थी, जिसके बाद से वह रहस्यमय तरीके से गायब है।

लापता युवती मूल रूप से नैनीताल जिले के रामनगर की रहने वाली है। एमबीए की पढ़ाई कर रही बबीता अपने परिवार में सबसे बड़ी है और उसके दो भाई हर्षित पांडे तथा तनुज पांडे रामनगर में ही पर्यटन व्यवसाय से जुड़े हैं। घर पर उसके माता-पिता और दादी बबीता की सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

पुलिस ने मामले में अपहरण की आशंका को देखते हुए दो युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इससे पहले एनडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना, नेहरू पर्वतारोहण संस्थान और हेलीकॉप्टर तक की मदद से उत्तरकाशी के इस पूरे इलाके में बेहद बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया जा चुका है। अब तक पुलिस की तकनीकी जांच में भी कोई ठोस कामयाबी हाथ नहीं लग सकी है।

समुद्र तल से लगभग 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित दयारा बुग्याल को ट्रेकिंग का स्वर्ग कहा जाता है। सर्दियों में बर्फ और गर्मियों में मखमली घास के मैदानों वाले इस बुग्याल से बंदरपूंछ, श्रीकंठ, द्रौपदी का डांडा और गंगोत्री पर्वतमाला साफ दिखती है। इसी खूबसूरती को देखने हर साल हजारों की संख्या में पर्यटक यहां आते हैं।

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