चमोली, 27 जून 2026 (दून हॉराइज़न)।
Karnaprayag Nihang Dispute : कर्णप्रयाग बाजार में हुए हिंसक विवाद मामले में गिरफ्तार किए गए चारों निहंग सिखों को आज शनिवार को गोपेश्वर जिला न्यायालय से जमानत मिल गई है। जिला और सत्र न्यायाधीश विंध्याचल सिंह ने मामले की सुनवाई करते हुए जमानत याचिका स्वीकार कर ली और रिहाई के सीधे आदेश जारी कर दिए।
अदालत में मामले की नियमित सुनवाई और विधिक कार्रवाई अपने निर्धारित समय पर जारी रहेगी। जमानत का यह फैसला ठीक उस वक्त आया है जब पंजाब से आए निहंगों के दल ने शासन-प्रशासन को 48 घंटे का खुला अल्टीमेटम दिया था।
बीती 16 जून 2026 को हेमकुंड साहिब के दर्शन करके लौट रहे निहंगों के एक दल का कर्णप्रयाग बाजार में किसी बात पर स्थानीय व्यापारियों से तीखा विवाद हुआ था। सड़क पर हुई मामूली कहासुनी कुछ ही मिनटों में हिंसक मारपीट में बदल गई जिसमें निहंगों ने तलवार से हमला कर कई स्थानीय लोगों को बुरी तरह लहूलुहान कर दिया।
दिनदहाड़े हुए इस खूनी संघर्ष से भड़के व्यापारियों और स्थानीय निवासियों ने बदरीनाथ हाईवे पर पूरा ट्रैफिक रोककर जाम लगा दिया था। पुलिस फोर्स ने मौके पर दबिश दी और चारों मुख्य आरोपी निहंगों को गिरफ्तार कर सीधे हवालात की हवा खिलाई।
चारों साथियों की जेल जाने की सूचना मिलते ही पंजाब के निहंगों ने 25 जून 2026 को भारी संख्या में उत्तराखंड कूच का सीधा ऐलान कर दिया था। करीब 400 निहंगों का बड़ा जत्था पंजाब से सीमा की तरफ बढ़ा जिसे भारी पुलिस डिप्लॉयमेंट ने देहरादून जिले के कुल्हान बॉर्डर पर ही रोक लिया।
कुल्हान में पुलिस और निहंगों के बीच भारी धक्का-मुक्की हुई और कुछ निहंगों ने बैरिकेडिंग तोड़कर जबरन देहरादून की सीमा में घुसपैठ कर ली थी। पुलिस के आला अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर घंटों लंबी मशक्कत के बाद उन्हें शांत किया और वापस हिमाचल की तरफ भेजा।
पुलिस प्रशासन के वापस लौटाने से पहले निहंगों ने दो दिन के भीतर जेल में बंद साथियों को रिहा न किए जाने पर दोबारा कूच की सख्त चेतावनी दी थी। फिलहाल यह पूरा जत्था हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब गुरुद्वारे में टिका हुआ है और वहीं से पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है।
16 जून की घटना के बाद से ही कर्णप्रयाग बाजार में भारी पुलिस बल तैनात है और सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों के चलते इलाके में तनाव लगातार बना रहा। अब चारों निहंगों की जमानत के विधिक दस्तावेज कोर्ट से सीधे जेल प्रशासन को भेजे जा रहे हैं।









