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Uttarakhand CM Review : फाइलों में नहीं, अब धरातल पर दिखेगा काम! लापरवाह और सुस्त अधिकारियों पर गिरेगी गाज

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देहरादून, 17 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।

Uttarakhand CM Review : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। राज्य के सभी जनपदों में अतिवृष्टि, मानसून की स्थिति, चारधाम यात्रा, डेंगू रोकथाम और आपदा प्रबंधन की तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए। जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर लापरवाही, शिथिलता या उदासीनता कतई स्वीकार नहीं की जाएगी। अधिकारी केवल बैठकों तक सीमित न रहें। उन्हें स्वयं ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करना होगा। प्रत्येक स्थिति पर सतत निगरानी बनाए रखना अनिवार्य है।

मानसून के दौरान प्रत्येक अधिकारी चौबीसों घंटे अलर्ट मोड में रहेगा। आपदा या आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्यों में एक क्षण की भी देरी नहीं होनी चाहिए। जिले में होने वाली प्रत्येक महत्वपूर्ण घटना की जानकारी तत्काल मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराई जाएगी। राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष को भी तुरंत अपडेट किया जाना है। राहत एवं पुनर्वास कार्यों में ढिलाई बरतने वालों पर कार्रवाई होगी।

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों से जिलेवार सड़कों की स्थिति का ब्यौरा मांगा। भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और चारधाम यात्रा मार्गों की विस्तृत जानकारी ली गई। विभिन्न धामों में यात्रियों की संख्या और व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। चारधाम यात्रा राज्य की आस्था और अर्थव्यवस्था दोनों से जुड़ी है। यात्रा मार्गों पर यात्रियों की सुरक्षा, सुगम आवाजाही और यातायात प्रबंधन में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। इस वर्ष अब तक 44.65 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधाम यात्रा कर चुके हैं। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन उत्तराखण्ड के प्रति आस्था का प्रमाण है।

भूस्खलन या मार्ग अवरुद्ध होने की संभावना वाले स्थानों पर पहले से मशीनें तैनात की जाएंगी। पर्याप्त संख्या में जेसीबी, पोकलैंड मशीनें, आवश्यक उपकरण और तकनीकी दल मोर्चे पर रहेंगे। सड़क बंद होने की स्थिति में तत्काल यातायात बहाल किया जाएगा। संवेदनशील क्षेत्रों में जीपीएस और आधुनिक संचार प्रणाली का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, विद्युत और पेयजल विभाग पूर्ण समन्वय के साथ कार्य करेंगे। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग भी इस तालमेल का हिस्सा रहेगा। किसी भी विभाग द्वारा यह नहीं कहा जाना चाहिए कि सूचना समय पर नहीं मिली। संसाधन उपलब्ध न होने का बहाना भी नहीं चलेगा। प्रत्येक विभाग अपनी जिम्मेदारी तय करते हुए समयबद्ध कार्य करेगा।

भारी वर्षा या भूस्खलन के कारण बिजली, पेयजल अथवा संचार सेवाएं बाधित होने पर बहाली सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। आमजन को मूलभूत सुविधाओं से लंबे समय तक वंचित नहीं रखा जा सकता। आवश्यक होने पर अतिरिक्त टीमें मौके पर भेजी जाएंगी। वैकल्पिक व्यवस्थाएं तत्काल लागू की जाएंगी।

दूरस्थ एवं संवेदनशील क्षेत्रों में खाद्यान्न, दवाइयों और ईंधन का पर्याप्त भंडारण पहले से सुनिश्चित किया जाएगा। सड़क बंद होने की स्थिति में स्थानीय नागरिकों को कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। गर्भवती महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों तथा गंभीर बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों की विशेष निगरानी की जाएगी। संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाएगा।

राज्य सरकार ने संवेदनशील क्षेत्रों में आपातकालीन परिस्थितियों के लिए हेली सेवा उपलब्ध रखने का निर्णय लिया है। आवश्यकता पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्यों में तत्काल सहायता पहुंचाई जाएगी। चिकित्सा सहायता के अभाव में जनहानि नहीं होनी चाहिए।

डेंगू की रोकथाम राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों तथा ग्राम पंचायतों को युद्धस्तर पर अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। जलभराव वाले सभी स्थानों की तत्काल पहचान कर वहां पानी की निकासी सुनिश्चित की जाएगी। नियमित फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव और विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। स्वयंसेवी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, युवा मंडलों और महिला समूहों को इस अभियान से जोड़ा जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग को सभी जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डेंगू जांच किट और पर्याप्त दवाइयां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। रक्त की उपलब्धता, बेड तथा चिकित्सा कर्मियों की पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी। मरीजों को उपचार में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होनी चाहिए।

आपदा प्रबंधन केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देना चाहिए। अधिकारी जनता के बीच जाएंगे। समस्याओं का समाधान करेंगे और प्रत्येक स्थिति की व्यक्तिगत निगरानी करेंगे। गत वर्ष आई आपदाओं से संबंधित जो कार्य पूरे किए जाने थे, उनमें से कोई भी कार्य लंबित नहीं रहना चाहिए। पिछले वर्ष स्वीकृत सभी कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण होंगे। उनकी अद्यतन प्रगति रिपोर्ट शासन एवं मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने अल्मोड़ा नगर में संचालित मास्टर प्लान के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्यों की समीक्षा की। राज्य के सभी जनपदों में 15 अक्टूबर तक पूर्ण होने वाले सभी विकास कार्यों की विस्तृत सूची तलब की गई है। कार्यों की वर्तमान प्रगति तत्काल मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराई जाएगी। किसी भी परियोजना में अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा।

राज्य सरकार द्वारा की गई सभी मुख्यमंत्री घोषणाओं की नियमित समीक्षा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में की जाएगी। प्रत्येक घोषणा समयबद्ध ढंग से धरातल पर दिखाई देनी चाहिए। जिन विभागों में कार्यों की गति धीमी है, वे अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाएंगे। व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी।

“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान का तीसरा चरण आगामी 15 सितंबर से नए स्वरूप में प्रारंभ किया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल शिविर लगाना नहीं है। सरकार को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना इसका मुख्य लक्ष्य है। प्रत्येक पात्र व्यक्ति को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा। शिविरों में प्रमाण पत्र, पेंशन, आयुष्मान कार्ड और राजस्व संबंधी सेवाएं सरलता से उपलब्ध कराई जाएंगी।

मानसून के दौरान सभी पुलों का सेफ्टी ऑडिट कराया जाएगा। जिन पुलों की स्थिति कमजोर है, वहां तत्काल आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। आवश्यकता पड़ने पर यातायात को नियंत्रित किया जाएगा। जोखिम उठाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सभी शहरों, कस्बों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में नालों का विशेष सफाई अभियान चलाया जाएगा।

दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में वैकल्पिक संचार व्यवस्था विकसित की जाएगी। प्राकृतिक आपदा के कारण मोबाइल संचार सेवाएं बाधित होने पर तत्काल वैकल्पिक संचार माध्यम उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रदेश के प्रत्येक जिले में एम्बुलेंस सेवाएं, जीवनरक्षक दवाइयां और चिकित्सकीय उपकरण पूरी तरह तैयार रखे जाएंगे।

मुख्यमंत्री स्वयं सरकार द्वारा विभिन्न जन सेवाओं के लिए चलाए जा रहे दूरभाष नंबरों पर संपर्क कर व्यवस्थाओं की जांच करते हैं। हरेला पर्व पर “एक पेड़ मां के नाम” अभियान को व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाएगा। सभी अधिकारी स्वयं पौधारोपण करेंगे। पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक की सहभागिता की मांग करता है।

आपदा से पूर्व प्रभावी तैयारी, त्वरित प्रतिक्रिया और समयबद्ध पुनर्वास सुनिश्चित किया जाना है। किसी भी आपदा अथवा आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए “गोल्डन ऑवर” का विशेष ध्यान रखा जाएगा। जनहित के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा।

जिलाधिकारी स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों, ग्राम प्रधानों, महिला मंगल दलों और युवक मंगल दलों के साथ नियमित समन्वय स्थापित करेंगे। उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

बैठक में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक एवं सतपाल महाराज उपस्थित थे। आपदा प्रबंधन राज्य सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय कुमार रोहिल्ला, सचिव विनोद कुमार सुमन, सचिव विनय शंकर पांडे मौजूद रहे। जिलाधिकारी देहरादून आशीष चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून, अपर सचिव बंशीधर तिवारी और विनीत कुमार ने बैठक में हिस्सा लिया। वर्चुअल माध्यम से राज्य के सभी जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

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