देहरादून, 18 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।
Dehradun Master Plan : मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की देहरादून महायोजना-2041 का ड्राफ्ट जनता के सुझावों के आधार पर तैयार किया जा रहा है। शनिवार को जनसंवाद अभियान के दसवें दिन उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण (हुडा) कार्यालय में जनसुनवाई हुई। राजीव गांधी कॉम्प्लेक्स, तहसील चौक स्थित कार्यालय में अधिकारियों ने पूरा दिन मौजूद रहकर लोगों की आपत्तियां सुनीं। व्यापारिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और भू-स्वामियों ने महायोजना के विभिन्न पहलुओं पर अपनी राय रखी।
नागरिकों ने सीधे तौर पर शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को सबसे प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाया। सड़क नेटवर्क का विस्तार करने और मल्टीलेवल पार्किंग बनाने की मांग अधिकारियों के सामने रखी गई। लोगों ने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के सुझाव दिए। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए वैकल्पिक यातायात मार्ग विकसित करने पर भी जोर दिया गया।
हरित क्षेत्रों, जल स्रोतों और नदियों के संरक्षण के लिए मास्टर प्लान में ठोस प्रावधान करने की मांग उठी। खुले सार्वजनिक स्थलों को बचाने को लेकर स्थानीय लोगों ने चिंता जाहिर की। वर्षा जल निकासी, जलभराव की समस्या और भूजल संरक्षण को लेकर अधिकारियों को कई प्रस्ताव मिले। भू-स्वामियों ने क्षेत्र विशेष की आवश्यकताओं के अनुरूप भूमि उपयोग प्रस्तावों और विकास नियंत्रण नियमों पर अपने विचार साझा किए।
एमडीडीए ने अगली जनसुनवाई का कार्यक्रम तय कर दिया है। 20 जुलाई 2026 को सेक्टर-11 की जनसुनवाई होगी। यह कार्यक्रम राजकीय बालिका पॉलिटेक्निक कॉलेज, सुद्धोवाला, देहरादून में आयोजित किया जाएगा। प्राधिकरण ने संबंधित क्षेत्र के नागरिकों, संस्थाओं और भू-स्वामियों से तय समय पर उपस्थित होकर आपत्तियां दर्ज कराने को कहा है।
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने जनभागीदारी को शहर के सुनियोजित विकास की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि देहरादून महायोजना-2041 केवल एक दस्तावेज नहीं है। यह आने वाले वर्षों के लिए राजधानी की एक व्यापक विकास दृष्टि है। नागरिकों से मिल रहे सुझाव इस योजना को व्यावहारिक, प्रभावी और जनहितकारी बना रहे हैं।
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्राप्त सभी सुझावों और आपत्तियों का व्यवस्थित रूप से अभिलेखीकरण किया जा रहा है। एमडीडीए की तकनीकी टीम हर बिंदु का विशेषज्ञ स्तर पर परीक्षण करेगी। विशेषज्ञों द्वारा इन सुझावों का तकनीकी और विधिक परीक्षण किया जाएगा। सभी व्यवहारिक सुझावों को अंतिम महायोजना में समुचित महत्व दिया जाएगा।









