देहरादून, 23 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।
Uttarakhand Nursing Protests : वर्षवार भर्ती प्रक्रिया दोबारा लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही बेरोजगार नर्सों का गुस्सा बुधवार को बेकाबू हो गया। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के यमुना कॉलोनी स्थित सरकारी आवास पर प्रतिनिधिमंडल के साथ चल रही बैठक बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। वार्ता टूटने के तुरंत बाद आवास के बाहर खड़ी चार महिला अभ्यर्थियों ने फिनायल पीकर जान देने की कोशिश की।
घटना के वक्त मौके पर अफरा-तफरी मच गई और पुलिसकर्मियों ने अभ्यर्थियों के हाथ से बोतल छीनने का प्रयास किया। उत्तरकाशी के चिन्यालीसौड़ क्षेत्र की रहने वाली अभ्यर्थी किरण रावत ने बोतल से काफी मात्रा में फिनायल गटक लिया। जहर पेट में जाते ही किरण सड़क पर बेहोश होकर गिर पड़ीं।
पुलिस प्रशासन ने गंभीर हालत को देखते हुए किरण रावत को तत्काल सिनर्जी अस्पताल पहुंचाया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में शिफ्ट किया गया। डॉक्टरों की टीम किरण की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
तीन अन्य महिला अभ्यर्थियों लीला, अन्नू और एक अन्य किरन ने भी अपने साथ लाई फिनायल की बोतलें खोलकर पीने की कोशिश की। मौके पर मौजूद महिला पुलिसकर्मियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए उनके साथ धक्का-मुक्की के बीच बोतलें छीन लीं। इस खींचतान में ज्यादातर केमिकल जमीन पर गिर गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
नर्सिंग एकता मंच के नवल पुंडीर, राजेंद्र कुकरेती और लीला चौहान का प्रतिनिधिमंडल सुबह मंत्री से मिलने उनके आवास के भीतर गया था। प्रदर्शनकारियों ने स्वास्थ्य विभाग में 25 और 26 जुलाई 2026 को प्रस्तावित लिखित परीक्षा को तुरंत रद्द करने की मांग रखी। बेरोजगारों का साफ कहना है कि पूर्व में चल रही वर्षवार वरिष्ठता सूची के आधार पर ही खाली पदों को भरा जाए।
वार्ता के दौरान शामिल नवल पुंडीर का कहना है कि मंत्री ने उनकी बात सुनने के बजाय मांगों का मजाक बनाया। स्वास्थ्य मंत्री ने समस्याओं का समाधान करने से साफ इनकार करते हुए प्रतिनिधिमंडल को तुरंत आवास परिसर से बाहर जाने को कह दिया। मंत्री के इस तरह के सख्त व्यवहार से बाहर इंतजार कर रही अभ्यर्थियों का सब्र टूट गया।
हंगामे और चीख-पुकार की सूचना मिलते ही कांग्रेस नेता ज्योति रौतेला भी मौके पर पहुंच गईं। पुलिस ने स्थिति को संभालने के लिए घेराबंदी की और ज्योति रौतेला को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेज दिया। बेरोजगार संघ के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर विचार नहीं किया तो पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
उधर शहर के दूसरे हिस्से में राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी मजदूर यूनियन के बैनर तले सैकड़ों कर्मियों ने सात सूत्रीय मांगों पर सचिवालय की ओर मार्च निकाला। पुलिस ने पहले से रणनीति बनाकर सुभाष रोड पर मजबूत बैरिकेडिंग कर रखी थी। प्रदर्शनकारियों को सचिवालय से काफी पहले ही रोक लिया गया।
सफाई कर्मचारियों ने पुलिस बल के सामने जमकर नारेबाजी की और सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। बाद में मौके पर पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट के जरिए मुख्यमंत्री को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा गया।
नगर निगम देहरादून और आसपास के शहरी निकायों से जुड़े कर्मचारी बुधवार सुबह 10 बजे नगर निगम परिसर में इकट्ठा हुए थे। करीब डेढ़ घंटे तक चले भाषण और नारेबाजी के बाद सुबह 11:30 बजे सभी कर्मचारी पैदल मार्च करते हुए सचिवालय के लिए निकले थे।
यूनियन के प्रदेश संरक्षक चौधरी नरेश वैध ने दोटूक कहा कि जब तक सरकार सभी मांगों पर ठोस शासनादेश जारी नहीं कर देती, तब तक निकायों में काम ठप रहेगा और नगर निगम परिसर में बेमियादी धरना चलता रहेगा।
कर्मचारियों की मुख्य मांग है कि जुलाई 2026 से सभी पर्यावरण मित्रों को रोजाना 800 रुपये के हिसाब से दिहाड़ी दी जाए। इसके साथ ही निकायों में लंबे समय से अटकी 715 अस्थायी पर्यावरण मित्रों की नई भर्ती को तत्काल पूरा किया जाए।
संगठन ने समान काम के लिए समान वेतन की व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई है। कर्मचारियों का कहना है कि अस्थायी कर्मियों को पक्का करने के लिए कटऑफ वर्ष को 2018 से बढ़ाकर 2024 किया जाए। इसके अलावा मृतक आश्रित कोटे के सख्त नियमों में ढील देकर परिजनों को तुरंत नौकरी दी जाए।
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