
ऋषिकेश, 24 जुलाई, 2026 (दून हॉराइज़न)।
Bajrang Setu Rishikesh : गंगा नदी पर बने नए बजरंग सेतु के पारदर्शी कांच वाले वॉकवे पर चलने के लिए अब पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अपनी जेब ढीली करनी होगी। लोक निर्माण विभाग (PWD) पुल के कांच वाले हिस्से की सुरक्षा, मेंटेनेंस और भीड़ नियंत्रण के लिए एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार कर रहा है।
इस नई व्यवस्था के तहत पारदर्शी ग्लास वॉकवे पर जाने वाले हर व्यक्ति के लिए शुल्क चुकाना अनिवार्य होगा। आगामी कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी जोखिम से बचने के लिए कांच वाले हिस्से को पूरी तरह से प्रतिबंधित रखने की तैयारी की गई है।
कांवड़ यात्रा के समय ऋषिकेश में श्रद्धालुओं का भारी दबाव रहता है और हजारों की संख्या में कांवड़िये पैदल यात्रा करते हैं। पुल के मुख्य हिस्से से सामान्य पैदल आवाजाही जारी रहेगी, लेकिन दोनों किनारों पर बने 60 मिलीमीटर मोटे टफेंड ग्लास वाले फुटपाथ को कड़ा पहरा लगाकर बंद रखा जाएगा।
करीब 132.30 मीटर लंबे और लगभग 8.60 मीटर चौड़े बजरंग सेतु को सिर्फ एक पुल के रूप में नहीं, बल्कि ऋषिकेश के एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के तौर पर विकसित किया गया है। पुल के दोनों तरफ कांच के फुटपाथ बनाए गए हैं, जहां से लोग सीधे नीचे बहती गंगा का विहंगम दृश्य देख सकते हैं।
इस खास फुटपाथ में इस्तेमाल किया गया कांच सामान्य नहीं है। इसमें पांच अलग-अलग परतों वाले टफेंड ग्लास को जोड़ा गया है, जिसमें प्रत्येक परत की मोटाई 12 मिलीमीटर है।
पुल के निर्माण के दौरान कांच को नुकसान पहुंचने के मामले सामने आ चुके हैं। अप्रैल महीने में पुल के एक कोने पर लगे कांच की ऊपरी परत क्षतिग्रस्त पाई गई थी, हालांकि नीचे की चार परतें सुरक्षित थीं।
इससे पहले जनवरी में भी एक मजदूर के हाथ से हथौड़ा छूट जाने के कारण कांच पर दरार आ गई थी, जिसे बाद में बदला गया था। मई 2026 में भी कांच को नुकसान की खबरें आने के बाद विभाग ने यहां सुरक्षात्मक कदम उठाए हैं।
लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पांडे के अनुसार, विश्व भर में इस तरह के पारदर्शी पुलों पर भीड़ संभालने और मेंटेनेंस फंड जुटाने के लिए टिकट प्रणाली लागू की जाती है। इसी मॉडल के आधार पर बजरंग सेतु के कांच वाले हिस्से के लिए शुल्क निर्धारित किया जा रहा है ताकि एक बार में सीमित संख्या में ही लोगों को प्रवेश दिया जा सके।
पुल की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए पूरे क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे और आधुनिक लाइटिंग सिस्टम लगाया गया है। इसके अलावा किनारों की ग्रिल को ऊंचा करने का काम भी लगभग पूरा कर लिया गया है।
बजरंग सेतु के निर्माण का इतिहास 90 साल पुराने लक्ष्मण झूला पुल के असुरक्षित घोषित होने से जुड़ा है। सुरक्षा कारणों से पुराने पुल को बंद किए जाने के बाद स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं के सामने गंगा पार करने का बड़ा संकट खड़ा हो गया था।
वर्ष 2022 में करीब 69.20 करोड़ रुपये की लागत से इस नए पुल का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। निर्माण कार्य में कई तरह की तकनीकी चुनौतियां आईं, जिसके चलते परियोजना अपनी तय समय-सीमा से आगे खिंचती चली गई।
अब विभाग की पूरी कोशिश है कि बजरंग सेतु का संचालन व्यवस्थित ढंग से हो। सामान्य राहगीर बिना किसी शुल्क के सेतु के पक्के हिस्से का इस्तेमाल कर सकेंगे, जबकि एडवेंचर और फोटोग्राफी का अनुभव चाहने वालों को ग्लास वॉकवे का टिकट लेना होगा।








