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Dehradun Student Protest : देहरादून घंटाघर पर छात्रों का प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

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देहरादून, 24 जुलाई, 2026 (दून हॉराइज़न)।

Dehradun Student Protest : देहरादून के दिल कहे जाने वाले घंटाघर पर स्थित उत्तराखंड के गांधी स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी की प्रतिमा के आसपास आज शाम भारी गहमागहमी देखने को मिली। कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े दर्जनों युवाओं और छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने पेपर लीक की घटनाओं से नाराज होकर जोरदार विरोध प्रदर्शन दर्ज कराया।

हाथों में ‘शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो’ के बड़े-बड़े पोस्टर थामे युवाओं ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद की। लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश के प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है।

प्रदर्शन स्थल पर मौजूद छात्रा हिदाया अली खान ने पत्रकारों से खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ कहा कि देश का नौजवान आज किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं बल्कि अपने जायज हक के लिए सड़कों पर उतरा है।

हिदाया अली खान ने स्पष्ट चेतावनी दी कि छात्रों को मौजूदा सरकार से हर हाल में जवाबदेही चाहिए। अगर यह सरकार पेपर लीक रोकने और दोषियों पर कार्रवाई करने में विफल रहती है तो युवा यही मांग आने वाली किसी भी नई सरकार के सामने दोहराते रहेंगे।

शिक्षा और स्वास्थ्य को देश की बुनियाद बताते हुए हिदाया ने कहा कि अगर देश को सही दिशा में चलाना है तो शासन व्यवस्था में व्यापक सुधार बेहद जरूरी हैं। युवाओं का धैर्य अब पूरी तरह जवाब दे चुका है।

उन्होंने आगे कहा कि अगर मौजूदा सरकार शिक्षा प्रणाली में गुणात्मक सुधार लाने में पूरी तरह अक्षम साबित हो रही है तो युवाओं के पास रास्ता खुला है। भारतीय संविधान ने हर नागरिक को ‘राइट टू प्रोटेक्ट’ और ‘राइट टू स्पीच’ का अटूट अधिकार दिया है और युवा व्यवस्था बदलने के लिए इन अधिकारों का इस्तेमाल करेंगे।

प्रदर्शन के दौरान छात्रा इरा थापा का दर्द और गुस्सा साफ झलक रहा था। उन्होंने नीट पेपर लीक प्रकरण के बाद देहरादून में हुए रिया पांड़ा सुसाइड केस का जिक्र करते हुए माहौल को बेहद भावुक कर दिया।

इरा थापा ने तीखे शब्दों में कहा कि नीट पेपर लीक की वजह से रिया पांड़ा ने हताश होकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी। देश भर में ऐसे न जाने कितने ही होनहार छात्र हर साल आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं।

सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए इरा ने कहा कि छात्र-छात्राओं की मौतों का यह आंकड़ा शासन के लिए बेहद छोटी बात बनकर रह गया है। प्रशासनिक और राजनीतिक संवेदनहीनता अपने चरम पर पहुंच चुकी है।

देश में लोकतंत्र के मौजूदा ढांचे पर सवाल उठाते हुए इरा थापा ने कहा कि आज समाज में डर और भय का ऐसा खौफनाक माहौल पैदा कर दिया गया है कि आम नागरिक और छात्र अपनी बात कहने के लिए खड़े होने से भी डर रहे हैं।

इरा थापा ने वहां मौजूद सभी युवाओं और छात्रों से एकजुट होने की भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि सभी को ‘जय हिंद-जय भारत’ के नारों के साथ पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी न्यायसंगत आवाज को बुलंद करना होगा।

सोनम वांगचुक के लोकतांत्रिक संघर्ष का उदाहरण देते हुए इरा ने कहा कि भले ही युवा तुरंत इतना बड़ा कदम न उठा पाएं, लेकिन कम से कम अपनी जायज मांगों के लिए आवाज उठाना तो बंद नहीं कर सकते।

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