देहरादून, 29 जुलाई, 2026 (दून हॉराइज़न)।
Uttarakhand Rain Alert : उत्तराखंड के अलग-अलग इलाकों में सोमवार देर रात से ही मूसलाधार बारिश जारी है। मंगलवार सुबह बारिश की वजह से राज्यभर में भूस्खलन और सड़कें धंसने की खबरें आने लगीं। बिगड़ते मौसम और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने 28 और 29 जुलाई के लिए चारधाम यात्रा को पूरी तरह रोक दिया है।
राज्य में तीन राष्ट्रीय राजमार्गों के अलावा 140 से अधिक ग्रामीण और संपर्क मार्ग मलबे के कारण पूरी तरह ठप पड़ चुके हैं। यातायात बाधित होने से जगह-जगह यात्री और स्थानीय निवासी फंसे हुए हैं। संबंधित विभागों की टीमें रास्ते खोलने के काम में लगी हुई हैं।
देहरादून में नंदा की चौकी के पास पुल की एप्रोच रोड पानी के प्रचंड बहाव में बह गई। इस घटना के बाद इलाके में आवाजाही पूरी तरह रुक गई थी। शाम को प्रशासनिक टीमों ने मुस्तैदी दिखाते हुए क्षतिग्रस्त रोड को दुरुस्त कर दोबारा गाड़ियो की आवाजाही शुरू कराई।
मसूरी में लगातार हो रही वर्षा की वजह से पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा नीचे आ गिरा। मलबे की चपेट में आने से एक रेस्तरां पूरी तरह ध्वस्त हो गया। घटना के समय वहां किसी के न होने से बड़ी जनहानि होने से टल गई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्षा और आपदा के हालात को देखते हुए समीक्षा बैठक की। उन्होंने राज्य के सभी संबंधित विभागों को सातों दिन चौबीस घंटे हाई अलर्ट मोड पर बने रहने का स्पष्ट निर्देश दिया है।
मुख्यमंत्री धामी ने मंगलवार तड़के ही आपदा प्रबंधन सचिव को फोन कर राज्य के हर जिले की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राहत और बचाव के किसी भी कार्य में एक सेकंड का भी विलंब नहीं होना चाहिए।
आपात स्थितियों से तत्काल निपटने के लिए राज्य में तैनात हेली सेवाओं को पूरी तरह तैयार रखने के आदेश दिए गए हैं। दुर्गम और बेहद प्रभावित क्षेत्रों तक खाद्य सामग्री व चिकित्सीय मदद हेलीकॉप्टर के जरिए पहुंचाई जाएगी।
सड़कों पर जमा विशाल बोल्डर और मलबा हटाने के लिए जेसीबी और पोकलेन जैसी भारी मशीनों को तैनात किया गया है। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को कमरों से निकलकर सीधे ग्राउंड जीरो पर उतरकर हालात की निगरानी करने को कहा है।
आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक और मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने भी प्रशासनिक अधिकारियों से लगातार हो रही वर्षा का अपडेट लिया। शासन स्तर से हर जिले के कंट्रोल रूम को आपस में जुड़े रहने का निर्देश दिया गया है।
मौसम निदेशक डॉ. सीएस तोमर के अनुसार प्रदेश में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और मजबूत मानसूनी सिस्टम का प्रभाव बना हुआ है। इसके असर से अगले दो दिनों तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में भारी से अत्यंत भारी बारिश होने के आसार हैं।
बीते 24 घंटों के दौरान देहरादून जिले में औसतन 95.8 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। मालदेवता क्षेत्र में सबसे ज्यादा 233 मिमी बारिश हुई जिससे नदियां उफान पर आ गईं।
हाथीबड़कला में 194.5 मिमी, देहरादून शहर में 107 मिमी, मोहकमपुर में 97.5 मिमी और रायवाला में 63.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई। मूसलाधार बारिश के चलते दून का अधिकतम तापमान सोमवार के 31.7 डिग्री सेल्सियस से चार डिग्री गिरकर मंगलवार को 27.7 डिग्री सेल्सियस पर आ गया।
केदारनाथ हाईवे पर जगह-जगह पहाड़ियों से गिरे भारी पत्थरों के कारण दिनभर यातायात बाधित रहा। कुंड और मुनकटिया के पास विशाल बोल्डर गिर गए थे, जिन्हें हटाने में चार घंटे से ज्यादा का समय लगा।
जानकीचपट्टी-यमुनोत्री पैदल मार्ग पर राम मंदिर के पास नदी का जलस्तर बहुत ज्यादा बढ़ गया। तेज बहाव के चलते लगभग 25 से 30 मीटर लंबा पैदल रास्ता नदी के कटाव से दो से ढाई मीटर तक नीचे धंस गया है।
यमुनोत्री का रास्ता धंसने के कारण वहां श्रद्धालुओं की आवाजाही फिलहाल रोक दी गई है। लोक निर्माण विभाग बड़कोट के अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों के लिए जल्द ही एक वैकल्पिक पैदल मार्ग का निर्माण कराया जाएगा।
रुद्रप्रयाग के तिलवाड़ा-सुमाड़ी पुल के नीचे बह रही नदी में लकड़ी इकट्ठा करने गई तीन महिलाएं अचानक जलस्तर बढ़ने से बहते पानी के बीच फंस गईं। स्थानीय लोगों और बचाव दल की कड़ी मशक्कत के बाद तीनों महिलाओं को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
चमोली जिले के बदरीनाथ हाईवे पर कंचन नाला उफान पर आने से यातायात मंगलवार को भी पूरी तरह ठप रहा। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने बताया कि कंचन नाले के मलबे को साफ कर मार्ग को सुचारु कराने की कोशिशें लगातार की जा रही हैं।
बारिश के कारण अकेले चमोली जिले में 21 संपर्क मार्ग मलबे से अट गए हैं। ग्रामीण इलाकों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है, जिससे रोजमर्रा की चीजों की आपूर्ति पर असर पड़ रहा है।









