---Advertisement---

उत्तराखंड में 13 गुलदार और 3 भालुओं को मारने के आदेश जारी, जानिये क्यों लेना पड़ा ऐसा फैसला

---Advertisement---

देहरादून, 29 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।

उत्तराखंड के पहाड़ी और तराई इलाकों में इंसानों पर लगातार हो रहे खूनी हमलों को देखते हुए वन विभाग ने बेहद सख्त कदम उठाया है। चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन के स्तर से 13 गुलदारों और 3 भालुओं को जान से मारने के बाकायदा आदेश जारी कर दिए गए हैं। शिकारी टीमों को जंगलों में तैनात किया गया है, लेकिन अब तक केवल पौड़ी जिले में ही एक आदमखोर गुलदार को ढेर किया जा सका है।

बीते सात महीनों के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चला है कि राज्यभर में 118 वन्यजीव इंसानी बस्तियों के लिए सीधे तौर पर काल बन चुके हैं। चिह्नित किए गए जानवरों की सूची में 90 गुलदार, 21 बाघ और 8 भालू शामिल हैं। बाघों को जान से मारने के बजाय ट्रैंकुलाइज़ करके पकड़ने और पिंजरों में कैद करने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।

यह तमाम ऐसे जानवर हैं जो बार-बार ग्रामीण और शहरी इलाकों में घुसकर लोगों पर घात लगाकर हमले कर रहे थे। वन विभाग के अफसरों का कहना है कि किसी भी वन्यजीव को गोली मारने की इजाजत केवल आखिरी रास्ते के तौर पर दी जाती है। जब जानवर को खदेड़ने या पकड़ने के सभी जमीनी उपाय पूरी तरह नाकाम हो जाते हैं, तब कानून के तहत अनुमति ली जाती है।

पहाड़ों के गांवों से लेकर मैदानी क्षेत्रों के सीमांत इलाकों तक वन्यजीवों की लगातार मौजूदगी से लोग दहशत में रातें गुजार रहे हैं। खेती-किसानी करने वाले ग्रामीण और शाम के वक्त घरों से निकलने वाले बच्चे सबसे आसान शिकार बन रहे हैं। वन विभाग का दावा है कि इन खतरनाक जानवरों को हटाने से ही ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा की भावना वापस लौट पाएगी।

पिछले एक दशक का रिपोर्ट कार्ड बताता है कि उत्तराखंड में गुलदार और बाघ का खौफ किस कदर फैला है। वर्ष 2015 में बाघ के हमलों में 2 और गुलदार के हमलों में 26 लोगों ने जान गंवाई थी। वर्ष 2016 में बाघ से 4 और गुलदार से 23 मौतें दर्ज हुईं। वर्ष 2017 में बाघों ने 7 और गुलदारों ने 9 लोगों को मौत के घाट उतारा। वर्ष 2018 में यह आंकड़ा बाघ से 6 और गुलदार से 15 रहा।

इसके बाद वर्ष 2019 में बाघ के हमलों से 3 और गुलदार से 18 जानें गईं। वर्ष 2020 में बाघ से केवल 1 मौत हुई लेकिन गुलदार ने रिकॉर्ड 30 लोगों को मार डाला। वर्ष 2021 में बाघ से 2 और गुलदार से 23 मौतें हुईं। वर्ष 2022 में स्थितियां और बिगड़ीं जब बाघ ने 16 और गुलदार ने 22 लोगों को शिकार बनाया। वर्ष 2023 में बाघ से 17 और गुलदार से 18 लोगों की जान गई।

साल 2024 में बाघ के हमलों में 12 और गुलदार के हमलों में 15 मौतें दर्ज की गईं। पिछले साल यानी 2025 में बाघ ने 12 और गुलदार ने 18 लोगों को मौत की नींद सुला दिया। चालू वर्ष 2026 में अब तक की बात करें तो बाघ के हमलों में 12 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि गुलदार ने 16 मासूमों को अपना शिकार बना लिया है।

दस साल के पूरे आंकड़े जोड़ें तो वन्यजीवों के खूनी हमलों में कुल 327 लोग अपनी जिंदगी गंवा चुके हैं। आंकड़ों से साफ है कि मौतों के मामले में गुलदार सबसे ज्यादा घातक साबित हुए हैं, हालांकि पिछले कुछ सालों में बाघों के आक्रामक होने की दर भी तेजी से बढ़ी है। वन विभाग की विशेष गश्ती टीमें अब बचे हुए चिह्नित जानवरों की ट्रैकिंग में जुटी हुई हैं।

Join WhatsApp

Join Now
---Advertisement---

Leave a Comment