दून हॉराइज़न, रुद्रप्रयाग (17 अगस्त 2026): मानसून की भारी बारिश के बीच सड़कों पर लगातार गिर रहे मलबे और बंद रास्तों को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है। जिला कार्यालय सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सीधा असंतोष जताया। लंबे समय से संपर्क मार्गों के ठप रहने से नाराज मंत्री ने संबंधित एजेंसियों को बिना देरी किए यातायात बहाल करने का अल्टीमेटम थमा दिया है।
राहत और बचाव तंत्र को मैदान में सक्रिय रखने के लिए प्रशासनिक अमले को सीधी चेतावनी जारी की गई है। मदन कौशिक ने स्पष्ट किया कि संकट की घड़ी में जनता को होने वाली असुविधा पर कोई बहानेबाजी नहीं चलेगी। काम में सुस्ती दिखाने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उन पर विभागीय गाज गिराई जाएगी।
समीक्षा के दौरान जिले के चिन्हित संवेदनशील इलाकों, बंद मोटर मार्गों और मौके पर मौजूद भारी मशीनरी की वास्तविक स्थिति जांची गई। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, डीडीआरएफ और क्विक रिस्पॉन्स टीमों की कार्यप्रणाली और तैनाती पर बिंदुवार ब्योरा मांगा गया। आपात स्थिति पैदा होने पर उपकरण कितनी देर में ग्राउंड जीरो पर पहुंच रहे हैं, इसका पूरा हिसाब लिया गया।
इंपैनल की गई सभी जेसीबी और पोकलैंड मशीनों को लैंडस्लाइड होते ही सीधे मौके पर रवाना करने की रणनीति बनाई गई है। मशीनरी की लोकेशन का लाइव डेटा रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि मलबा साफ करने में समय का नुकसान न हो। तहसील स्तर पर उप जिलाधिकारियों को अपने क्षेत्रों की सड़कों और सरकारी संपत्तियों की जमीनी निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है।
बाजार क्षेत्रों में पानी भरने की समस्या पर मंत्री ने गहरी नाराजगी जताई। अगस्त्यमुनि और तिलवाड़ा जैसे प्रमुख बाजारों में हर बरसात में दुकानों और सड़कों पर जलजमाव हो जाता है। इसके स्थायी निवारण के लिए सिंचाई और लोनिवि को तत्काल प्रभाव से नया ड्रेनेज मास्टर प्लान तैयार करने को कहा गया है।
पीपलकोटी टनल में हुए हालिया हादसे की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा तंत्र को अपग्रेड करने पर जोर दिया गया। जटिल भौगोलिक परिस्थितियों में फंसे लोगों को निकालने के लिए विशेष मॉक ड्रिल और तकनीकी विशेषज्ञों का सहयोग लिया जा रहा है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि संसाधन जुटाने में बजट की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी।
केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों, भारतीय सेना और राज्य पुलिस के बीच बेहतर तालमेल बिठाकर रेस्क्यू ऑपरेशनों की गति बढ़ाई जाएगी। खराब मौसम के दौरान पहाड़ी ढलानों और लैंडस्लाइड जोन पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
बिजली आपूर्ति, पेयजल लाइन, सिंचाई नेटवर्क और स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान आते ही तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था लागू करनी होगी। मानसून सीजन के दौरान केदारनाथ धाम की यात्रा पर आ रहे तीर्थयात्रियों और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा को शीर्ष प्राथमिकता पर रखा गया है।
इस उच्चस्तरीय बैठक में केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम कठैत, भाजपा जिलाध्यक्ष भारत भूषण भट्ट, जिलाधिकारी विशाल मिश्रा, पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर, मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत और अपर जिलाधिकारी श्याम सिंह राणा समेत जिले के तमाम विभागीय मुखिया मौजूद रहे।









