दून हॉराइज़न, देहरादून (20 अगस्त 2026): श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय की परीक्षा परिणाम प्रणाली में आई भारी खामियों ने पूरे गढ़वाल मंडल के डिग्री कॉलेजों में तनाव पैदा कर दिया है। बीए, बीएससी और बीकॉम सहित विभिन्न संकायों के छात्र-छात्राएं परीक्षा देने के बाद भी मार्कशीट में अनुपस्थित दर्ज होने और पोर्टल से नंबर गायब होने पर आक्रोशित हैं।
अगस्त्यमुनि स्थित राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में छात्रसंघ अध्यक्ष प्रियांशु मोहन की अगुवाई में चल रहा आमरण अनशन तीसरे दिन भी जारी रहा। लंबे समय से भूखे-प्यासे बैठे रहने की वजह से प्रियांशु का स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम ने धरना स्थल पर पहुंचकर प्रियांशु मोहन के स्वास्थ्य की सघन जांच की। डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि उनके शरीर में पानी की गंभीर कमी हो गई है, जिसकी वजह से पेशाब से जुड़ी समस्या उत्पन्न हो रही है। शुगर का स्तर सामान्य से नीचे आ चुका है, हालांकि ब्लड प्रेशर अभी स्थिर पाया गया। डॉक्टरों ने लगातार मेडिकल मॉनिटरिंग के निर्देश जारी किए हैं।
प्रियांशु मोहन ने साफ कर दिया कि जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन सभी त्रुटियों को दूर नहीं करता, तब तक अनशन खत्म करने का सवाल ही नहीं उठता। धरना स्थल पर पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष हिमांशु भट्ट, छात्र नेता गणेश गोस्वामी, मानसी, रवीना, प्राची और कॉलेज के प्राचार्य प्रो. कैलाश चंद्र दूदपुरी मौजूद रहे।
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय उत्तरकाशी में आक्रोशित विद्यार्थियों ने कॉलेज के मुख्य गेट पर विश्वविद्यालय के कुलपति का पुतला जलाया। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए व्यवस्था को पूरी तरह फेल करार दिया।
उत्तरकाशी के छात्रों का कहना है कि समर्थ पोर्टल पर पहले अंक और परिणाम दिखाई दे रहे थे, जो अचानक सिस्टम से पूरी तरह गायब हो गए। कई मेधावी छात्र-छात्राओं को बिना किसी ठोस आधार के बैक थमा दी गई है।
प्रथम वर्ष के छात्रों को परीक्षा शुल्क जमा करने के बावजूद अब तक कॉलेज पहचान पत्र जारी नहीं किए गए हैं। छात्र प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि मार्कशीट और पोर्टल का विवाद तत्काल हल नहीं हुआ तो वे आंदोलन को अनियंत्रित स्तर तक ले जाएंगे।
छात्रों ने विश्वविद्यालय के समक्ष पांच सूत्रीय मांग पत्र रखा है। इन मांगों में सभी उत्तर पुस्तिकाओं का भौतिक सत्यापन, गलत बैक और शून्य अंक हटाने, समर्थ पोर्टल पर तत्काल सही डेटा अपलोड करने, अनुपस्थित दर्ज विद्यार्थियों का अटेंडेंस रिकॉर्ड सुधारने और पूरी परीक्षा प्रणाली की निष्पक्ष दोबारा जांच कराने का मुद्दा शामिल है।
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय देहरादून और राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय मालदेवता रायपुर में भी कई छात्र-छात्राओं के परिणाम में भारी गलतियां मिली हैं। कई छात्रों की मार्कशीट पर ‘आरएल’ यानी रिजल्ट लेट अंकित कर दिया गया है। छात्रों का सीधा आरोप है कि उत्तर पुस्तिकाओं का सही मूल्यांकन किए बिना ही मनमाने अंक चढ़ाए गए हैं। दोनों कॉलेजों के पीड़ित छात्रों ने प्राचार्यों को लिखित शिकायत सौंपकर त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
ऊधमसिंह नगर जिले के किच्छा स्थित सूरजमल विश्वविद्यालय में नर्सिंग के छात्र-छात्राएं अपनी मांगों को लेकर लगातार आंदोलनरत हैं। यहां के छात्र 29 जुलाई 2026 से लगातार बेमियादी धरने पर बैठे हुए हैं।
नर्सिंग छात्रों का आरोप है कि प्रवेश के समय प्रबंधन ने इंडियन नर्सिंग काउंसिल (आईएनसी) से जल्द मान्यता प्राप्त होने का वादा किया था। अब तक संस्थान को आईएनसी की मान्यता नहीं मिल पाई है, जिससे छात्रों का करियर अधर में लटक चुका है। प्रबंधन और छात्रों के बीच कई दौर की बैठकें बेनतीजा साबित हुई हैं।
श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय की परीक्षा नियंत्रक स्वाति नेगी ने गड़बड़ियों पर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिणाम में सामने आई ज्यादातर खामियां संबद्ध कॉलेजों के स्तर पर हुई लापरवाही का नतीजा हैं।
कॉलेजों ने छात्र-छात्राओं के आंतरिक मूल्यांकन और प्रैक्टिकल के अंक निर्धारित समय सीमा के भीतर विश्वविद्यालय के ऑनलाइन पोर्टल पर नहीं चढ़ाए। ऑफलाइन माध्यम से भी ये अंक तब भेजे गए जब विश्वविद्यालय मुख्य परीक्षा का परिणाम जारी कर चुका था। ऑफलाइन रिकॉर्ड मिलने के बाद विश्वविद्यालय स्तर पर तेजी से डाटा सुधार का काम किया जा रहा है।








