दून हॉराइज़न, देहरादून (07 सितम्बर): राजधानी के कचहरी परिसर स्थित ऐतिहासिक शहीद स्मारक स्थल पर अपनी लंबित भर्तियों को लेकर डटे युवाओं का सब्र अब पूरी तरह जवाब दे रहा है। 2013 से अटकी नियुक्तियों के निस्तारण की मांग को लेकर चल रहे धरने के 85 दिन पूरे हो चुके हैं। शासन स्तर पर मुख्यमंत्री के दखल और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ औपचारिक बातचीत होने के बावजूद धरातल पर फाइलें आगे न सरकने से अभ्यर्थियों में गहरा रोष फैल गया है।
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मुख्य सचिव के वादे के 13 दिन बाद भी आदेश नहीं
धरना दे रहे अभ्यर्थियों का एक अधिकृत प्रतिनिधिमंडल हाल ही में मुख्यमंत्री से मिला था, जिसके बाद उच्च स्तरीय निर्देशों पर मुख्य सचिव आनंद वर्धन के साथ सचिवालय में विस्तृत वार्ता हुई थी। इस बैठक में तय हुआ था कि विधिक और प्रशासनिक पेंच सुलझाने के लिए एक औपचारिक कैबिनेट सब-कमेटी (Cabinet Sub-Committee) का गठन किया जाएगा और 10 से 15 दिनों के भीतर इस 13 साल पुराने गतिरोध का सर्वमान्य हल खोजा जाएगा। लेकिन, वार्ता संपन्न हुए करीब दो हफ्ते बीतने को हैं और अब तक समिति गठन का शासनादेश तक जारी नहीं हो पाया है।
खटीमा से लेकर विकासनगर तक के युवाओं का फूटा दर्द
सोमवार को धरने में शामिल होने राज्य के दूर-दराज इलाकों से भी युवा पहुंचे। उधमसिंह नगर के सीमांत खटीमा से पहुंचीं अभ्यर्थी सुनीता ठाकुर और पछवादून के विकासनगर निवासी राम किशन ने दो-टूक कहा कि युवाओं ने अपने जीवन के सबसे अहम साल कोर्ट-कचहरी और सचिवालय के चक्कर काटते हुए गंवा दिए हैं। मंच के संयोजक अम्बुज शर्मा का कहना था कि प्रशासन लगातार बातचीत के नाम पर वक्त जाया कर रहा है। उन्होंने अल्टीमेटम दिया कि यदि अगले 48 से 72 घंटों के भीतर कैबिनेट सब-कमेटी की आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई, तो आंदोलन का स्वरूप बदलकर आर-पार की लड़ाई शुरू की जाएगी।
आंदोलनकारी संगठनों का मिला खुला साथ
सोमवार को आंदोलन को तब और मजबूती मिली जब उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष सुरेश कुमार अपने सहयोगियों के साथ धरना स्थल पर पहुंचे और युवाओं की मांग को जायज ठहराते हुए समर्थन का ऐलान किया। मौके पर अमित सिंह परमार, विकास रावत, पुष्पलता वैश्य, राजदुलारी लोधी, गीता नेगी, प्रभात डंडरियाल, जगमोहन सिंह रावत, गुरु प्रसाद पेटवाल, सावित्री पवार, उमेद चंद रमोला और मनोज पैन्यूली सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से जल्द ठोस निर्णय लेने का दबाव बनाया।
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प्रशासनिक स्तर पर यदि अगले 2-3 दिनों में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो अभ्यर्थी देहरादून में एक बड़ी रणनीतिक बैठक बुलाकर सचिवालय या विधानसभा घेराव जैसे बड़े कदम का ऐलान कर सकते हैं।









