दून हॉराइज़न, देहरादून (07 सितंबर): दून घाटी की आबोहवा में बीते तीन वर्षों के दौरान आया बदलाव अब राष्ट्रीय स्तर पर आंकड़ों की कसौटी पर खरा उतरा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा जारी स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 (Swachh Vayu Sarvekshan) के ताजा नतीजों में उत्तराखंड की राजधानी ने 3 से 10 लाख आबादी वाले शहरों के वर्ग में देशभर में 12वां स्थान हासिल कर लिया है। यह छलांग छोटी नहीं है।
यह भी पढ़ें : देहरादून में करोड़ों के भूमि घोटाले का मुख्य आरोपी नवीन मित्तल गिरफ्तार, कोर्ट ने 5 दिन की रिमांड में भेजा
साल 2024 में जहां शहर 41वें पायदान पर संघर्ष कर रहा था, वहीं 2025 में 19वीं रैंक पर आने के बाद अब यह देश के शीर्ष दर्जन शहरों की कतार में खड़ा हो चुका है।
धूल पर वार: मैकेनाइज्ड स्वीपिंग और ड्रोन का दखल
घाटी में हवा की गुणवत्ता बिगड़ने का सबसे बड़ा कारण सड़कों की धूल और निर्माण कार्यों से उड़ने वाले बारीक पार्टिकुलेट मैटर (PM 10 और PM 2.5) रहे हैं। नगर निगम ने इस चक्र को तोड़ने के लिए पारंपरिक झाड़ू प्रणाली से आगे बढ़कर मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग मशीनों का दायरा बढ़ाया। शहर के मुख्य मार्गों—खासकर सहारनपुर रोड, राजपुर रोड और हरिद्वार बाईपास के संवेदनशील कॉरिडोर—पर रात के वक्त नियमित स्वीपिंग तय की गई। इतना ही नहीं, अत्यधिक धूल वाले हॉटस्पॉट्स पर ड्रोन के जरिए एरियल वाटर मिस्टिंग का सहारा लिया गया, जिससे वायुमंडल में तैर रहे धूलकण तेजी से नीचे बैठ सकें।
वाहनों के धुएं पर सख्ती और ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर
देहरादून जैसे तेजी से बढ़ते अर्बन सेंटर में ऑटोमोबाइल उत्सर्जन पर काबू पाना हमेशा से चुनौती रहा है। परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस ने प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC) की जांच केवल चौराहों तक सीमित न रखकर मोबाइल वैन के जरिए औचक छापों में बदली। साथ ही, सार्वजनिक व निजी परिवहन में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए शहर के प्रमुख जंक्शनों, आईएसबीटी और सरकारी परिसरों में फास्ट चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए। यह कदम सीधे तौर पर टेलपाइप एमिशन को कम करने में असरदार साबित हुआ।
खुले में कूड़ा और सूखी पत्तियां जलाना दून की सर्द हवाओं को दमघोंटू बना देता था। इस पर नगर निगम ने वार्ड स्तर पर सफाई निरीक्षकों की जवाबदेही तय की और चालान की प्रक्रिया को तेज किया।
सीएम धामी बोले – जनसहयोग से बना जनआंदोलन
देहरादून के अलावा राज्य के दो अन्य औद्योगिक व पर्यटन केंद्र—ऋषिकेश और काशीपुर—ने भी अपनी संबंधित श्रेणियों में पिछले वर्ष के मुकाबले बेहतर स्कोर किया है।
यह भी पढ़ें : दून की सड़कों पर खुदे गड्ढों से मिलेगी राहत, अब 15 दिन में पूरी करनी होगी मरम्मत
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि पर नगर निगम, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय नागरिकों को बधाई देते हुए कहा कि तीन वर्षों में 41वें स्थान से सीधे 12वें पायदान पर पहुंचना प्रदेश की पर्यावरण नीतियों और नागरिकों की सतर्कता का संयुक्त नतीजा है। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि विकास कार्यों के समानांतर वायु गुणवत्ता को प्राथमिकता देना ही सरकार की स्थायी नीति है। शहर की निगाहें अब 2027 के सर्वेक्षण में देश के शीर्ष 5 शहरों में जगह बनाने पर टिकी हैं।









