दून हॉराइज़न, हरिद्वार (9 सितंबर): विश्व के सबसे बड़े धार्मिक समागम यानी हरिद्वार कुंभ 2027 (Haridwar Kumbh 2027) के लिए उत्तराखंड सरकार ने अभी से अपनी कमर कस ली है। करोड़ों श्रद्धालुओं के जुटने वाले इस महाआयोजन में राशन की कोई किल्लत न हो, इसके लिए केंद्र सरकार ने अपना खजाना खोल दिया है। राज्य को 8,000 मीट्रिक टन से अधिक गेहूं और चावल का स्पेशल कोटा मंजूर किया गया है।
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खाद्यान्न आवंटन: किस नियम के तहत मिला बंपर राशन?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विशेष अनुरोध पर मोदी सरकार ने यह त्वरित कदम उठाया है। दरअसल, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) की गाइडलाइंस में एक बेहद अहम क्लॉज है।
इसके मुताबिक कुंभ जैसे विशाल आयोजनों के लिए केंद्र सरकार किसी भी संबंधित राज्य को उसके सालाना खाद्यान्न कोटे का अधिकतम दो फीसदी हिस्सा अतिरिक्त रूप से दे सकती है। इसी नियम के तहत भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने उत्तराखंड के लिए कुल 8,029.152 मीट्रिक टन अनाज पास किया है।
इसमें 3,051.079 मीट्रिक टन गेहूं है। जबकि 4,978.073 मीट्रिक टन चावल शामिल है। सीएम धामी ने इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है। साथ ही राज्य के आला अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि श्रद्धालुओं की सहूलियत से जुड़े तमाम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स समय सीमा के भीतर हर हाल में पूरे होने चाहिए।
मनसा देवी रूट: टाइल्स नहीं, कंक्रीट की सड़क मांग रहे लोग
उधर ग्राउंड जीरो पर स्थानीय लोग मेला प्रशासन से व्यावहारिक और सुरक्षित विकास की मांग कर रहे हैं। मनसा देवी पैदल मुख्य मार्ग का मुद्दा इस वक्त गरमाया हुआ है। ब्रह्मपुरी वार्ड के पार्षद सोहित सेठी ने सीधे कुंभ मेला अधिकारी को पत्र लिखकर प्रस्तावित इंटरलॉकिंग टाइल्स का कड़ा विरोध किया है। उनकी मांग स्पष्ट है—यहां सिर्फ आरसीसी (RCC) की मजबूत सड़क बननी चाहिए।
वजह बहुत जमीनी है। यह रास्ता पहाड़ से सटा हुआ ‘हिल बाईपास’ है। बरसात होते ही पहाड़ों से भारी मात्रा में मिट्टी और मलबा सीधे सड़क पर आ गिरता है। अगर यहां इंटरलॉकिंग टाइल्स लगीं, तो चिकनी मिट्टी जमने से पूरा रास्ता बेहद खतरनाक और फिसलन भरा हो जाएगा। हादसों का सीधा शिकार पैदल चलने वाले श्रद्धालु और दोपहिया वाहन चालक होंगे।
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इसके अलावा इस रूट पर बस और टेंपो ट्रैवलर जैसे भारी वाहनों का भी भारी दबाव रहता है, जिनका रोजाना का वजन सामान्य टाइल्स बर्दाश्त नहीं कर पाएंगी। कुंभ के दौरान यहां प्रतिदिन लाखों का फुटफॉल होगा, ऐसे में आरसीसी सड़क ही लंबे समय तक चलने वाला एकमात्र सुरक्षित विकल्प नजर आ रहा है।









