दून हॉराइज़न, देहरादून (09 सितम्बर 2026): राजधानी देहरादून से लेकर केदारनाथ धाम के अहम पड़ाव रुद्रप्रयाग तक राज्य की सरकारी संपत्तियों का नक्शा जल्द ही बदलने वाला है। धामी सरकार ने दशकों पुरानी जर्जर इमारतों को ढहाकर उनकी जगह हाईटेक और ईको-फ्रेंडली भवनों के निर्माण का खाका तैयार कर लिया है।
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राज्य संपत्ति एवं आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की हालिया उच्चस्तरीय बैठकों में करीब 77 करोड़ रुपये की दो बड़ी आवासीय और प्रशासनिक परियोजनाओं पर अंतिम मुहर लगी है।
केदारनाथ रूट पर रणनीतिक प्रशासनिक केंद्र बनेगा रतूड़ा गेस्ट हाउस
रुद्रप्रयाग का रतूड़ा इलाका चारधाम यात्रा मार्ग पर एक बेहद अहम बिंदु है। आपदा प्रबंधन और प्रशासनिक नजरिए से इस पर्वतीय जिले की संवेदनशीलता हमेशा अधिक रही है। इसे ध्यान में रखते हुए यहां 48.84 करोड़ रुपये (लगभग 4884.20 लाख) की भारी-भरकम लागत से एक अत्याधुनिक राज्य अतिथि गृह का निर्माण किया जाना है।
यह महज़ एक साधारण वीआईपी रेस्ट हाउस नहीं होगा। असल में, सरकार इसे एक ‘कम्युनिकेशन हब’ के तौर पर विकसित कर रही है। सचिव डॉ. राजेश कुमार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि गेस्ट हाउस का कॉन्फ्रेंस हॉल मजबूत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाओं और बड़े टीवी स्क्रीन से पूरी तरह लैस हो। आपदा या किसी बड़े वीआईपी मूवमेंट के वक्त यहीं से पूरे जिले की मॉनिटरिंग की जा सकेगी। पहाड़ों में प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिहाज से यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
रेसकोर्स: पुरानी जर्जर कॉलोनी की जगह लेंगे हाईटेक ‘ग्रीन’ आवास
देहरादून का रेसकोर्स इलाका शहर की सबसे पुरानी और प्रीमियम कॉलोनियों में गिना जाता है, जहां कई सरकारी क्वार्टर अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं। अब इन पुराने जर्जर ढांचों को जमींदोज कर यहां 48 नए श्रेणी-3 (Type-3) आवासीय भवन बनाए जाएंगे। सामान्यतः मध्य स्तर के सरकारी कर्मचारियों (पे-लेवल 5 से 7) को आवंटित होने वाले इन आवासों के निर्माण पर 28.07 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
यह बदलाव बेहद जरूरी था। लगातार हो रहे भारी मरम्मत खर्च से बचने के लिए अब विभाग ऐसी निर्माण सामग्री इस्तेमाल करेगा, जिसकी ‘मेंटेनेंस कॉस्ट’ शून्य के बराबर हो। इसके अलावा, सभी नई इमारतों को ‘ग्रीन बिल्डिंग’ (Green Building) कॉन्सेप्ट पर तैयार किया जा रहा है। गिरते जलस्तर की समस्या से जूझ रहे दून शहर के लिए इन आवासों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य कर दिया गया है।
नदी से 200 मीटर की दूरी और एनजीटी के सख्त नियम
पहाड़ों पर बड़े निर्माण कार्यों में अक्सर पर्यावरण को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। विशेषकर 2013 की त्रासदी के बाद से नदियों के किनारे होने वाले निर्माण पर खासी सख्ती बरती गई है। यही वजह है कि रतूड़ा में बनने वाले अतिथि गृह के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के मानकों को सबसे ऊपर रखा गया है।
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कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग (PWD) को सख्त ताकीद की गई है कि निर्माण स्थल की नदी से दूरी कम से कम 200 मीटर होनी चाहिए। बिना इसका प्रमाण-पत्र संलग्न किए प्रोजेक्ट की ईंट भी नहीं रखी जाएगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप, इन दोनों प्रोजेक्ट्स में पहाड़ की पारम्परिक स्थानीय वास्तुशैली का भी खास ध्यान रखा जा रहा है। तय समय सीमा में काम पूरा कराने के लिए राज्य संपत्ति विभाग अब लगातार इसकी मॉनिटरिंग करेगा।









