---Advertisement---

उत्तराखंड में हैट्रिक के लिए बीजेपी का बड़ा प्लान, हारी हुई 23 सीटों पर उतरेंगे दिग्गज

---Advertisement---

दून हॉराइज़न, हल्द्वानी (11 सितंबर): देवभूमि में सत्ता की लगातार तीसरी पारी खेलने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जमीनी जमावट शुरू कर दी है। कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी पहुंचे पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी रणनीतिकार नितिन नवीन ने स्पष्ट कर दिया कि 2027 का रण जीतने के लिए उन 23 विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष जोर रहेगा, जहां पिछली बार पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था।

चार जिलों की 36 सीटों पर टिका सत्ता का पूरा गणित

उत्तराखंड विधानसभा में कुल 70 सीटें हैं, जहां सरकार बनाने का जादुई आंकड़ा 36 है। दिलचस्प बात यह है कि राज्य के महज चार बड़े जिलों—देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर और नैनीताल—को मिला दें तो ठीक 36 सीटें बन जाती हैं। वर्तमान में इन चारों जिलों में भाजपा के पास 21 विधायक हैं, जबकि 15 सीटों पर विपक्ष का कब्जा है।

पार्टी नेतृत्व का मानना है कि यदि इन मैदानी और तराई-भाबर के इलाकों में पकड़ मजबूत कर ली जाए, तो सत्ता की राह बेहद आसान हो जाएगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के अलावा सभी सांसदों और कैबिनेट मंत्रियों को इन कमजोर क्षेत्रों में सीधा मोर्चा संभालने का जिम्मा सौंपा गया है। सिर्फ बैठकें करने से काम नहीं चलेगा। नेताओं को इन विधानसभाओं के गांवों में बाकायदा रात गुजारनी होगी और स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ सीधा संवाद बनाना होगा।

जयपुर वीसा में चाय और सामाजिक समरसता की सियासत

हल्द्वानी दौरे के दौरान नितिन नवीन का अचानक बदला कार्यक्रम सियासी हलकों में चर्चा का विषय बन गया। बेरीपड़ाव स्थित अष्टादश भुजा महालक्ष्मी मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद उनका काफिला मोटाहल्दू के जयपुर वीसा गांव पहुंच गया। वहां उन्होंने अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाले भाजपा बूथ अध्यक्ष राकेश कुमार आर्य के घर बैठकर परिजनों के साथ चाय पी।

दरअसल, पिछले दिनों हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यक्रम के बाद हुए तथाकथित शुद्धीकरण विवाद को लेकर विपक्ष हमलावर था। ऐसे में इस कदम को सीधे तौर पर जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं के सम्मान और सामाजिक समरसता (Social Harmony) के ठोस संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

विकास का मोदी मॉडल और ध्रुवीकरण की काट

पार्टी ने साफ किया है कि 2027 के चुनाव अभियान में आक्रामक राष्ट्रवाद और डबल इंजन सरकार के विकास कार्यों का तालमेल देखने को मिलेगा। ऑल वेदर रोड, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना और केदारनाथ-बद्रीनाथ पुनर्निर्माण जैसे बड़े बुनियादी ढांचे के काम भाजपा के मुख्य नैरेटिव का हिस्सा रहेंगे।

लेकिन चुनावी मैदान सिर्फ विकास के भरोसे नहीं छोड़ा जाएगा। राज्य में जनसांख्यिकीय बदलाव, तुष्टिकरण के विरोध और सख्त धर्मांतरण कानून जैसे मुद्दों को भी धार दी जाएगी। उधर, कांग्रेस के विरोध प्रदर्शनों पर पलटवार करते हुए भाजपा प्रवक्ता सुरेश तिवारी ने कहा कि चार साल तक गायब रहने वाले विपक्षी दल अब चुनावी आहट पाकर सड़कों पर नाटक कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now
---Advertisement---

Leave a Comment