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पहले अंकिता मर्डर केस और अब हल्द्वानी विवाद, विफलताओं को छिपा रही सरकार: गोदियाल

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दून हॉराइज़न, देहरादून (11 सितंबर): हल्द्वानी के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद हुए कथित मंच शुद्धिकरण (Stage Purification) मामले ने उत्तराखंड की सियासत में बड़ा बवंडर खड़ा कर दिया है। भाजपा नेता नितिन नवीन द्वारा राहुल गांधी पर दिए गए बयान के बाद अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गणेश गोदियाल ने मोर्चा खोलते हुए सत्ताधारी दल पर तीखा हमला बोला है। गोदियाल ने दो टूक कहा कि समाज को बांटने वाली राजनीति करने वालों को सद्भाव और भाईचारे पर प्रवचन देने का कोई नैतिक हक नहीं है।

‘विभाजनकारी सोच’ पर गोदियाल का सीधा वार

देहरादून में प्रेस को जारी बयान में गणेश गोदियाल ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की धरती पर आकर इस तरह का विभाजनकारी नैरेटिव खड़ा करना बेहद संकीर्ण मानसिकता का परिचायक है। राहुल गांधी ने कन्याकुमारी से कश्मीर और मणिपुर से मुंबई तक हजारों किलोमीटर पैदल चलकर देश को जोड़ने की मुहिम चलाई थी। लेकिन भाजपा 24 घंटे ध्रुवीकरण की फिराक में रहती है। जब भी विपक्ष पिछड़ों, वंचितों और शोषितों के हक में जातिगत जनगणना की मांग उठाता है, तो सत्ता पक्ष को इसमें देश का बंटवारा दिखाई देने लगता है।

मूल मुद्दों से भटकाने का आरोप

गोदियाल ने आरोप लगाया कि नितिन नवीन का कुमाऊं दौरा केवल पुष्कर सिंह धामी सरकार की प्रशासनिक विफलताओं पर पर्दा डालने की कवायद है। उत्तराखंड में डबल इंजन की व्यवस्था जनता की उम्मीदों पर पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। आज राज्य में अंकिता भंडारी हत्याकांड की निष्पक्ष न्याय प्रक्रिया, चरम पर पहुंच चुकी बेरोजगारी, बेलगाम महंगाई और बिगड़ती कानून व्यवस्था जैसे ज्वलंत सवाल मुंह बाए खड़े हैं। इन बुनियादी सवालों पर जवाब देने के बजाय सत्ताधारी दल के नेता अनाप-शनाप बयानबाजी कर जनता का ध्यान भटका रहे हैं।

8 अगस्त की रैली और 11 अगस्त का कथित अनुष्ठान

विवाद की जड़ें दरअसल पिछले महीने की तारीखों से जुड़ी हैं। 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की एक विशाल जनसभा संपन्न हुई थी। आरोप है कि इसके ठीक तीन दिन बाद, यानी 11 अगस्त को कुछ लोगों ने उसी मंच पर पहुंचकर गंगाजल छिड़कते हुए धार्मिक अनुष्ठान किया और उसे ‘शुद्ध’ करने का दावा किया। कांग्रेस का कहना है कि देश के सबसे बड़े दलित नेताओं में शुमार खड़गे के मंच पर आने के बाद ऐसा कृत्य करना सीधे तौर पर सामंती और दलित विरोधी सोच को दर्शाता है।

अब कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर सड़क से लेकर प्रशासनिक स्तर तक धामी सरकार की घेराबंदी कर रही है और अनुष्ठान करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग पर अड़ी है।

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