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चीरबासा के पास पहाड़ी से गिरे पत्थर, केदारनाथ यात्रा रोकी गई, हेली सेवा भी टली

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दून हॉराइज़न, रुद्रप्रयाग (14 सितंबर): केदारनाथ पैदल ट्रैक पर लगातार दूसरे दिन भी पहाड़ से बोल्डर और मलबा गिरने का सिलसिला जारी रहने से यात्रा रोक दी गई है। चीरबासा हेलीपैड के समीप हुए लैंडस्लाइड (Kedarnath Landslide) के चलते शासन-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है।

रविवार पूर्वाह्न 11 बजे हुए हादसे में एक स्थानीय व्यक्ति की जान चली गई थी। इसके बाद सोमवार सुबह भी इसी संवेदनशील हिस्से से पत्थर गिरने लगे, जिससे सुरक्षा कारणों से आवागमन फौरन थामना पड़ा।

चीरबासा के पास बोल्डर गिरने से हड़कंप, सुरक्षित पड़ावों पर रोके गए यात्री

पैदल मार्ग बंद होते ही केदारनाथ धाम से नीचे उतर रहे श्रद्धालुओं और ऊपर जा रहे यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। सोनप्रयाग कोतवाली प्रभारी सुरेश चंद्र बलूनी के अनुसार, रविवार को बोल्डर की चपेट में आकर जान गंवाने वाले व्यक्ति की शिनाख्त पठाली (ऊखीमठ) निवासी 65 वर्षीय मदन मोहन तिवारी के रूप में हुई है। घटना के फौरन बाद धाम से लौट रहे यात्रियों को जंगलचट्टी और ऊपर जा रहे तीर्थयात्रियों को सोनप्रयाग व गौरीकुंड बेस कैंप पर रोक दिया गया।

मार्ग पर स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF), जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDRF), युवा मंगल दल (YMF), आपदा मित्र और स्थानीय पुलिस के जवान तैनात हैं। जैसे ही मौसम थोड़ा संभला, भीमबली से गौरीकुंड की तरफ आ रहे लोगों को सुरक्षा घेरे में लेकर चरणबद्ध तरीके से सुरक्षित निकाला गया।

दिल्ली में वीआईपी सुरक्षा के चलते 15 सितंबर से हेली सेवा शुरू होना नामुमकिन

पैदल ट्रैक पर रुकावट के बीच धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को दूसरा बड़ा झटका विमानन सेवा के मोर्चे पर लगा है। केदारनाथ धाम के लिए यात्रा के दूसरे चरण की हेलीकॉप्टर सेवा (Helicopter Service) 15 सितंबर से शुरू नहीं हो पाएगी। नोडल अधिकारी राहुल चौबे ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन की सुरक्षा और आधिकारिक व्यस्तता के चलते आवश्यक हेलीकॉप्टर समय पर उत्तराखंड नहीं पहुंच पाए।

प्रक्रिया के तहत हेलीकॉप्टरों के पहुंचने के बाद पहले स्थानीय स्तर पर ट्रायल रन पूरा किया जाता है, जिसके बाद नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) की टेक्निकल टीम सुरक्षा ऑडिट और रूट इंस्पेक्शन करती है। डीजीसीए से फाइनल क्लीयरेंस मिलने के बाद ही टिकट बुकिंग और नियमित उड़ानों की अनुमति मिलती है। चौपर आने में कम से कम दो से चार दिन का वक्त और लग सकता है, लिहाजा 15 सितंबर की निर्धारित डेडलाइन टलना तय है।

7 पर्वतीय जिलों में बारिश की चेतावनी, प्रशासन ने की अपील

मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) ने सोमवार को रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़, देहरादून, हरिद्वार, टिहरी और पौड़ी में कहीं-कहीं गर्जन के साथ तेज बारिश की संभावना जताई है। ढलानों पर मिट्टी ढीली होने से चट्टानें खिसकने का जोखिम बना हुआ है।

प्रशासन ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जब तक पहाड़ी से बोल्डर गिरना बंद नहीं होता और मार्ग पर मलबा पूरी तरह साफ नहीं कर दिया जाता, तब तक कोई भी यात्री मनमाने ढंग से आगे न बढ़े।

यात्री केवल जिला आपदा कंट्रोल रूम और पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक बुलेटिन के आधार पर ही अपनी आगे की यात्रा की योजना बनाएं।

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