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दून में MBBS दाखिले में बड़ा फर्जीवाड़ा, मां-बेटी समेत 5 पर FIR दर्ज

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दून हॉराइज़न, देहरादून (15 सितंबर): राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG) के जरिए उत्तराखंड के प्रतिष्ठित राजकीय मेडिकल कॉलेजों में सीट हासिल करने की होड़ के बीच एक बेहद सुनियोजित फर्जीवाड़ा सामने आया है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी (Freedom Fighter Quota) आश्रित कोटे के नाम पर जाली दस्तावेजों के सहारे सरकारी एमबीबीएस सीटें कब्जाने के आरोप में पुलिस ने चार छात्राओं और एक छात्रा की मां सहित पांच लोगों पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। रायपुर और क्लेमनटाउन थानों में कंडोली व संबंधित क्षेत्र के राजस्व उप-निरीक्षकों (पटवारियों) की तहरीर पर यह कानूनी कार्रवाई हुई है।

प्रशासनिक स्तर पर कराई गई प्राथमिक जांच में खुलासा हुआ कि अभ्यर्थियों ने जिन मकानों के पते दर्शाकर राजस्व प्रमाण पत्र बनवाए थे, वे वहां कभी रहे ही नहीं। फर्जीवाड़े की पुष्टि होते ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने चार छात्राओं का आवंटन रद्द कर दिया। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस पूरे खेल के पीछे कोई संगठित शिक्षा माफिया या सिंडिकेट तो सक्रिय नहीं था।

कम नंबरों पर सरकारी कॉलेज, अंकों का चौंकाने वाला गणित

काउंसिलिंग डेटा खंगालने पर सामने आया कि बेहद कम मेरिट के बावजूद इन छात्राओं को मनचाहे कॉलेज अलॉट हो गए थे। महज 234 अंक हासिल करने वाली स्वाति को राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर आवंटित हुआ था। वहीं 301 अंक वाली खुशी को भी श्रीनगर, 338 अंक लाने वाली परी को राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी और 400 अंक पाने वाली तृप्ति को हरिद्वार मेडिकल कॉलेज की सरकारी सीट मिल गई।

सामान्य कोटे में जहां 600 से अधिक अंकों पर भी सरकारी कॉलेज के लिए कड़ा मुकाबला रहता है, वहीं आरक्षित कोटे में फर्जी प्रमाण पत्रों के दम पर 27 हजार से लेकर 88 हजार तक की ऑल इंडिया रैंक पर दाखिले पक्के करा लिए गए थे। क्लेमनटाउन पुलिस ने तृप्ति और उसकी मां उमा देवी पर मामला दर्ज किया है, जबकि रायपुर में खुशी, परी और स्वाति के खिलाफ केस दर्ज हुआ है।

पटवारियों की प्रारंभिक रिपोर्ट और राजस्व विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने राजस्व विभाग की जमीनी पड़ताल पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन पटवारियों की तहरीर पर अब मुकदमे लिखे गए हैं, हैरत की बात यह है कि पूर्व में उन्हीं की रिपोर्ट के आधार पर प्रमाण पत्र जारी किए गए थे। क्या प्रमाणपत्र जारी करते वक्त कोई भौतिक सत्यापन (Physical Verification) हुआ था, या केवल ऑनलाइन अपलोड किए गए कागजों पर दस्तखत कर दिए गए?

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोबाल के मुताबिक, आरोपियों ने जिन दस्तावेजों और पहचान पत्रों का इस्तेमाल किया, उनके पते पूरी तरह असत्यापित पाए गए हैं। दून पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) [धोखाधड़ी], 338 और 340 [जालसाजी] के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस अधीक्षक-नगर प्रमोद कुमार ने स्पष्ट किया है कि दोनों थानों के मुकदमों की संयुक्त जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) बना दिया गया है।

अब SC-ST वर्ग के 8 छात्र भी जांच के घेरे में

स्वतंत्रता सेनानी कोटे में धांधली की परतें खुलते ही अब अन्य आरक्षित श्रेणियों पर भी शिकंजा कसने लगा है। हेमवती नंदन बहुगुणा (HNB) उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने एससी-एसटी श्रेणी के तहत छह सरकारी और दो निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेने वाले कुल 8 अभ्यर्थियों को नोटिस थमा दिया है। परीक्षा नियंत्रक प्रो. विजय जुयाल के अनुसार, पहली काउंसलिंग को लेकर कई लिखित और ई-मेल शिकायतें मिली थीं।

इसके बाद इन सभी छात्रों को अपने मूल निवास, जाति और श्रेणी संबंधी सत्यापित कागजातों के साथ व्यक्तिगत रूप से तलब किया गया है। विवि प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अब सभी मेडिकल कॉलेजों में किसी भी श्रेणी का आरक्षण तभी मान्य होगा, जब संबंधित जिला प्रशासन उसके दस्तावेजों का मौके पर जाकर अंतिम सत्यापन पूरा कर लेगा।

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