दून हॉराइज़न, देहरादून (15 सितंबर): राजधानी देहरादून के पछवादून इलाके में प्रॉपर्टी माफिया और अनधिकृत कॉलोनाइजरों के खिलाफ मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) ने सख्त तेवर अख्तियार कर लिए हैं। झाझरा स्थित एलपी विलास के सामने, सैनिक कॉलोनी क्षेत्र के नंदा एन्क्लेव में करीब पांच बीघा कृषि व खाली भूमि पर गुपचुप तरीके से काटी जा रही अनधिकृत प्लॉटिंग (Illegal Plotting) पर मंगलवार को एमडीडीए की प्रवर्तन टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोज़र चला दिया।
मौके पर बिना तलपट नक्शा स्वीकृत कराए बाउंड्रीवॉल, आंतरिक सड़कें और पिलर बनाकर जमीन बेचने की तैयारी चल रही थी, जिसे पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया।
नंदा एन्क्लेव में बिना तलपट नक्शे के हो रही थी सौदेबाजी
दरअसल, यह पूरा मामला झाझरा क्षेत्र में चरनपाल आदि द्वारा विकसित की जा रही गैर-कानूनी आवासीय कॉलोनी से जुड़ा है। प्राधिकरण को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि नेशनल हाईवे से सटे इस बेल्ट में भू-उपयोग नियमों की अनदेखी कर धड़ल्ले से प्लॉट काटे जा रहे हैं। जब एमडीडीए की तकनीकी टीम ने स्थल निरीक्षण किया, तो मौके पर मौजूद पक्ष कोई भी स्वीकृत ले-आउट या वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सका।
इसके बाद उत्तराखंड नगर एवं ग्राम नियोजन तथा विकास अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत चालान काटकर विधिवत वाद दायर किया गया। नोटिस की मियाद पूरी होने और कॉलोनाइजर की ओर से कोई वैध साक्ष्य न दिए जाने के बाद संयुक्त सचिव और जोनल अधिकारी के नेतृत्व में ध्वस्तीकरण का आदेश तामील कराया गया। जेसीबी मशीनों ने चंद घंटों के भीतर पांच बीघा जमीन पर की गई तारबंदी, चूना मार्किंग और स्ट्रक्चर को उखाड़ फेंका।
विकासनगर से ऋषिकेश तक सेक्टरवार टीमों की घेराबंदी
पछवादून और डोईवाला जैसे उपनगरीय इलाकों में अवैध कॉलोनियों का जाल तेजी से पैर पसार रहा है। 2026 के शुरुआती आठ महीनों में प्राधिकरण ने ऐसे सौ से अधिक अवैध निर्माणों और दर्जनों प्लॉटिंग साइट्स को सील व ध्वस्त किया है। एमडीडीए ने पूरे दून घाटी क्षेत्र को अलग-अलग सेक्टरों में बांटकर निगरानी टीमें गठित कर दी हैं। विकासनगर, सहसपुर, ऋषिकेश, रायपुर और डोईवाला जैसे इलाकों में ये विशेष टीमें रोजाना ग्राउंड सर्वे कर रही हैं, ताकि सड़क और सीवर का खाका खींचे बिना बसने वाली कॉलोनियों पर शुरुआती दौर में ही रोक लग सके।
जमीन खरीदारों के लिए भारी जोखिम, अधिकारियों ने दी चेतावनी
अनियोजित विकास का खामियाजा अंततः आम मध्यमवर्गीय खरीदार को भुगतना पड़ता है। एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने स्पष्ट कहा कि झाझरा की यह कार्रवाई नजीर है और किसी भी सूरत में मास्टर प्लान के मानकों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। यदि कोई व्यक्ति बिना 30-40 फीट चौड़ी एप्रोच रोड, ड्रेनेज लाइन और पार्क के लिए भूमि छोड़े बिना कच्ची प्लॉटिंग कर रहा है, तो उस पर गैंगस्टर एक्ट और राजस्व संहिता के तहत भी कार्रवाई पर विचार होगा।
प्राधिकरण के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने दूनवासियों और बाहर से आकर बसने वाले लोगों को सचेत किया है कि वे झाझरा, सेलाकुई या भाऊवाला क्षेत्र में प्रॉपर्टी डीलरों के झांसे में न आएं। रजिस्ट्री कराने से पहले एमडीडीए के ट्रांसपोर्ट नगर स्थित कार्यालय या आधिकारिक पोर्टल पर संबंधित खसरा नंबर का लैंड-यूज और अप्रूव्ड ले-आउट अवश्य चेक करें, अन्यथा अनधिकृत भूमि पर बने आशियाने पर कभी भी बुलडोज़र चल सकता है।









