दून हॉराइज़न, देहरादून (15 सितंबर): राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तावित आगामी जनगणना के दूसरे चरण को धरातल पर उतारने के लिए राजधानी देहरादून के प्रशासनिक तंत्र ने कसरत तेज कर दी है। कलेक्ट्रेट और नगर निगम की निगरानी में चार्ज अधिकारियों, सुपरवाइजरों और तकनीकी सहायकों के दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का आगाज हुआ।
नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडेय और अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा ने दीप प्रज्वलित कर सत्र का शुभारंभ किया। प्रशासन का सीधा लक्ष्य फील्ड स्तर पर शून्य त्रुटि के साथ डेटा जुटाना है।
डिजिटल पोर्टल से रियल-टाइम फीडिंग, कागजी ब्योरे से मुक्ति
दशकों पुरानी पारंपरिक कागजी प्रविष्टियों की जगह इस बार पूरी कवायद डिजिटल जनगणना (Digital Census) के रूप में सामने आ रही है। नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि पोर्टल आधारित व्यवस्था से फील्ड प्रगणकों को घर-घर जाकर डेटा अपलोड करने में आसानी होगी, जिससे मानवीय गलतियों की गुंजाइश न के बराबर रह जाएगी। संकलित आंकड़े सीधे केंद्रीय सर्वर पर सिंक होंगे।
प्रशिक्षण सत्र में जनगणना निदेशालय के संयुक्त निदेशक देवेन्द्र सिंह और उप निदेशक ने तकनीकी बारीकियों को साझा किया। वहीं तकनीकी विशेषज्ञ प्रदीप यादव और कुलदीप चौहान ने लाइव डेमो देकर समझाया कि नेटवर्क न होने पर ऑफलाइन मोड में डेटा कैसे सुरक्षित रखा जाएगा।
पारिवारिक ताने-बाने से लेकर विदेशी नागरिकों तक की सघन जांच
अपर जिलाधिकारी के.के. मिश्रा के अनुसार, इस चरण में नागरिकों की सामाजिक पृष्ठभूमि और पारिवारिक संरचना से जुड़े संवेदनशील बिंदु दर्ज होंगे। इनमें वैवाहिक स्थिति, तलाक, विधिक रूप से अलग रह रहे दंपती और एकल अभिभावक (Single Parent) परिवारों का स्पष्ट वर्गीकरण शामिल है।
खास बात यह है कि देहरादून जिले के संवेदनशील और गैर-अनुमति वाले क्षेत्रों में विदेशी नागरिकों व वीजा पर आए प्रवासियों की भी गहन प्रविष्टि की जाएगी। इसके लिए तहसील स्तर पर ऋषिकेश, विकासनगर, डोईवाला, सदर और चकराता के चार्ज अफसरों के साथ-साथ गढ़ी कैंट और क्लेमेंटाउन छावनी परिषद के प्रतिनिधियों को विशेष दायित्व सौंपे गए हैं।
प्रशिक्षण का यह दौर पूरा होते ही वार्ड और ग्राम स्तर पर मकानों के चिह्नीकरण की प्रशासनिक समीक्षा शुरू होगी।









