दून हॉराइज़न, देहरादून (16 सितंबर): राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्टाइपेंड (Stipend Hike) बढ़ाने की मांग को लेकर नौ दिनों से धरना दे रहे रेजिडेंट डॉक्टरों ने स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के आश्वासन के बाद अपना आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया है।
कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल बुधवार को सीधे अस्पताल परिसर स्थित धरना स्थल पहुंचे। वहां उन्होंने पीजी (Post Graduate), सीनियर रेजिडेंट (SR) और जूनियर रेजिडेंट (JR) डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल से आमने-सामने बात की। नौ दिन लंबे इस गतिरोध के दौरान अस्पताल की ओपीडी व्यवस्था और वार्ड सेवाओं पर लगातार दबाव बढ़ रहा था। सामान्य दिनों में यहां रोजाना ढाई से तीन हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, जिससे तीमारदारों की मुश्किलें बढ़ रही थीं।
मंत्रालय स्तर पर प्रस्ताव तैयार करने का भरोसा
वार्ता के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि चिकित्सकों की मांग पर शासन स्तर पर गंभीरता से मंथन चल रहा है। उनियाल ने कहा कि डॉक्टर स्वास्थ्य तंत्र की सबसे अहम रीढ़ हैं और उनके वेतन-भत्ते संबंधी विसंगतियों को लटकाना सरकार की मंशा नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, पड़ोसी राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में मिल रहे स्टाइपेंड ढांचे और उत्तराखंड के वर्तमान मानदेय के बीच के अंतर को पाटने के लिए वित्त विभाग के समन्वय से प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने भरोसा दिया कि जल्द ही इस संदर्भ में सकारात्मक शासनादेश जारी करने की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे।
निश्चित अवधि के लिए राहत, मांग पूरी न होने पर दोबारा विकल्प खुला
सरकार के इस सीधे हस्तक्षेप के बाद रेजिडेंट वेलफेयर से जुड़े डॉक्टरों ने आम सहमति से धरने को ‘निश्चित अवधि’ के लिए टालने का निर्णय लिया। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे चिकित्सकों का कहना है कि वे जनहित और मरीजों की तकलीफों को देखते हुए तत्काल प्रभाव से सामान्य ड्यूटी पर लौट रहे हैं। लेकिन, यदि तय समय सीमा के भीतर स्टाइपेंड वृद्धि का आधिकारिक शासनादेश जारी नहीं हुआ, तो वे पुनः लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने के लिए बाध्य होंगे। इस फैसले से दून अस्पताल की इमरजेंसी और रूटीन ओपीडी सेवाओं में व्यवस्था तुरंत सामान्य होने की उम्मीद है।









