देहरादून में MDDA द्वारा रिहायशी क्षेत्रों की दुकानों को नोटिस देने पर मचा घमासान। व्यापारियों ने सीएम धामी से हस्तक्षेप की मांग की।
देहरादून (20 अक्टूबर) : राजधानी देहरादून में एमडीडीए (MDDA) की सख्त कार्रवाई के खिलाफ व्यापारी वर्ग सड़क पर उतर आया है। रिहायशी और कमर्शियल क्षेत्रों में धड़ल्ले से बांटे जा रहे नोटिसों के चलते लगभग 185 से अधिक दुकानदारों की आजीविका पर सीधे संकट के बादल मंडराने लगे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दून वैली महानगर उद्योग व्यापार मंडल ने मोर्चा खोल दिया है और केंद्र सरकार के राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के सदस्य के नेतृत्व में प्रशासन के खिलाफ विरोध तेज कर दिया है।
एमडीडीए नोटिस से दून के व्यापारियों में हड़कंप
एमडीडीए द्वारा हाल ही में डिफेंस कॉलोनी, केदारपुरम और डालनवाला जैसे प्रमुख क्षेत्रों में ताबड़तोड़ नोटिस भेजे जाने के बाद से स्थानीय कारोबारियों में भारी तनाव देखा जा रहा है। व्यापारियों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, अकेले केदारपुरम में करीब 120 और डालनवाला में 65 दुकानदारों को नोटिस थमाए गए हैं, जो पिछले 10 से 20 वर्षों से अपनी दुकानें चला रहे हैं। अचानक हुई इस कार्रवाई से न केवल दुकानदारों का लाखों रुपये का निवेश डूबने की कगार पर आ गया है, बल्कि दुकानों में कार्यरत 400 से अधिक कर्मचारियों के परिवारों के सामने भी रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश और पैन-इंडिया संकट
इस पूरे विवाद की जड़ सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश और प्रशासनिक सख्ती से जुड़ी है जिसके तहत रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने की कवायद तेज की गई है। व्यापार मंडल के पदाधिकारियों का कहना है कि यह समस्या अब केवल देहरादून तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के दायरे में आने के कारण यह पूरे देश के व्यापारियों के लिए एक बड़ा कानूनी और आर्थिक संकट बनता जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर लगातार मिल रहे नोटिसों के विरोध में व्यापारियों ने अपने दस्तावेज और नोटिस संलग्न करते हुए राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड (NTWB) और डीपीआईआईटी के उत्तराखंड सदस्य पंकज कुमार मेंसोन को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है।
मुख्यमंत्री धामी के दरबार में पहुंचेगी गुहार
व्यापारियों की इस गंभीर समस्या पर कड़ा रुख अपनाते हुए दून वैली महानगर उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष पंकज कुमार मेंसोन ने इसे पूरी तरह अनुचित बताया है। उन्होंने सभी प्रभावित दुकानदारों को आश्वस्त किया है कि इस पूरे प्रकरण को प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समक्ष प्रमुखता से रखा जाएगा। प्रशासन के साथ उच्च स्तर पर वार्ता कर व्यापारियों को इस कानूनी पेच से राहत दिलाने और उनकी आजीविका को सुरक्षित करने के लिए हरसंभव प्रशासनिक कदम उठाए जाएंगे, ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन को टूटने से बचाया जा सके।









