देहरादून नगर निगम ने दीपावली से पहले पलटन बाजार में नुक्कड़ नाटक कर लोगों को पटाखों से होने वाले वायु प्रदूषण और इसके खतरों के प्रति जागरूक किया।
देहरादून, 7 नवंबर: दीपावली और त्योहारी सीजन को देखते हुए देहरादून नगर निगम वायु प्रदूषण को लेकर सख्त हो गया है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत शनिवार को शहर के सबसे व्यस्त पलटन बाजार में एक विशेष जन-जागरूकता अभियान चलाया गया। नगर आयुक्त के निर्देश पर निगम की टीम ने नुक्कड़ नाटक के जरिए आम जनता और व्यापारियों को पटाखों से निकलने वाले जहरीले धुएं के खतरों के बारे में बताया।
बच्चों और बुजुर्गों की सांसों पर भारी पड़ता है धुआं
नुक्कड़ नाटक के माध्यम से कलाकारों ने समझाया कि पटाखों से निकलने वाले सूक्ष्म कण, जिन्हें पीएम 2.5 और पीएम 10 कहा जाता है, सीधे फेफड़ों तक पहुंचते हैं। ठंड के मौसम में यह धुआं हवा में नीचे ही ठहर जाता है, जिससे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। यह स्थिति छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस की बीमारी या अस्थमा झेल रहे मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। निगम की टीम ने पलटन बाजार में खरीदारी करने आए लोगों से अपील की कि वे इस बार पर्यावरण के अनुकूल दीपावली मनाएं और पटाखों का कम से कम इस्तेमाल करें।
स्वच्छ वायु कार्यक्रम में शामिल है दून शहर
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की रिपोर्ट के मुताबिक, देहरादून देश के उन ‘नॉन-अटेनमेंट’ शहरों में शामिल है, जहां हवा की गुणवत्ता लगातार राष्ट्रीय मानकों से नीचे रही है। इसी को सुधारने के लिए शहर में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम लागू किया गया है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य हवा में मौजूद पीएम 10 और पीएम 2.5 जैसे प्रदूषकों की मात्रा को 2026 तक 40 प्रतिशत तक कम करना है। निगम का यह अभियान इसी बड़े लक्ष्य का हिस्सा है, ताकि त्योहारों के दौरान हवा को और ज्यादा जहरीली होने से बचाया जा सके।
| वायु गुणवत्ता (AQI) | स्थिति | स्वास्थ्य पर असर |
| 0-50 | अच्छी (Good) | कोई असर नहीं, हवा सुरक्षित |
| 101-200 | मध्यम (Moderate) | फेफड़े और दिल के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत |
| 301-400 | बहुत खराब (Very Poor) | लंबे समय तक संपर्क में रहने पर सांस की गंभीर बीमारी |
नगर निगम देहरादून लगातार यह प्रयास कर रहा है कि शहर के नागरिक खुद आगे आकर प्रदूषण कम करने में मदद करें। अधिकारियों ने साफ किया है कि बिना जनभागीदारी के स्वच्छ और स्वस्थ वायु का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।









