हरक सिंह रावत ने 23 साल पुराने कथित रेप के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पूर्व मंत्री ने इसे बीजेपी की साजिश बताते हुए मानहानि केस की चेतावनी दी है।
देहरादून, 7 नवंबर: उत्तराखंड के पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत ने खुद पर लगे 23 साल पुराने कथित रेप के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने असम की एक महिला द्वारा लगाए गए आरोपों को राजनीतिक साजिश करार देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर निशाना साधा है। कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में प्रेसवार्ता करते हुए रावत ने अपनी छवि खराब करने वालों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा करने की चेतावनी दी है।
छवि खराब करने वालों पर करेंगे मानहानि का केस
हरक सिंह रावत ने कहा कि 2003 के इस मामले में तत्कालीन सीबीआई और न्यायालय ने उन्हें क्लीन चिट दी थी। उन्होंने दावा किया कि उस समय केंद्र में बीजेपी की सरकार थी और सीबीआई उसी के अधीन काम कर रही थी। रावत ने कहा कि कोर्ट से बंद हो चुके मामले को 23 साल बाद उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है और वह अपनी छवि धूमिल करने वालों के खिलाफ मानहानि और न्यायालय की अवमानना का मुकदमा दर्ज कराएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह आज भी डीएनए जांच के लिए पूरी तरह तैयार हैं। रावत ने दावा किया कि सीबीआई रिपोर्ट में इस बात का जिक्र था कि आरोप लगाने वाली महिला का बोडो (असम के उग्रवादी समूह) से संबंध था और वह हथियारों के साथ पकड़ी गई थी।
अंकिता केस से ध्यान भटकाने का आरोप
पूर्व मंत्री ने इस पूरे विवाद के पीछे राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया। उनका कहना है कि कांग्रेस की ‘संकल्प और न्याय यात्रा’ और हाल ही में अमित शाह की रैली में दिखाए गए काले झंडों से बीजेपी घबरा गई है। रावत ने आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की लड़ाई और पेपर लीक जैसे अहम मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए बीजेपी ने सुनियोजित तरीके से इस महिला को तीन-चार दिन पहले देहरादून बुलाया है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि इस ‘खेल’ की शुरुआत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने की है और इसका अंत वह धामी की विदाई के साथ ही करेंगे।
2003 में देना पड़ा था मंत्री पद से इस्तीफा
यह पूरा विवाद साल 2003 से जुड़ा है, जब उत्तराखंड में नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी। उस समय असम की एक नाबालिग लड़की ने देहरादून के सरकारी अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दिया था। कथित तौर पर बच्चे के पिता होने का आरोप तत्कालीन मंत्री हरक सिंह रावत पर लगा था। इस गंभीर आरोप के बाद रावत को अपने मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। बाद में इस मामले की सीबीआई जांच हुई थी। हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा इस पुराने मुद्दे का जिक्र करने के बाद राज्य की राजनीति में यह मामला फिर से गरमा गया है।
23 साल बाद महिला ने दोहराए आरोप
गुरुवार 7 नवंबर को 23 साल बाद खुद को पीड़िता बताने वाली यह महिला देहरादून पहुंची और हरक सिंह रावत पर गंभीर आरोप लगाए। महिला का कहना है कि उस समय उसकी उम्र मात्र 16 साल थी और वह काफी दबाव में थी। महिला का कथित आरोप है कि तत्कालीन मंत्री ने उसके साथ रेप किया था। महिला ने यह भी दावा किया कि साल 2016 में भी उसने दिल्ली में मुकदमा दर्ज कराया था, तब भी तत्कालीन कांग्रेसी मंत्री ने जबरदस्ती की थी। हालांकि, सीबीआई जांच पर उसे संदेह है। महिला का आरोप है कि जांच के दौरान उससे सिर्फ एक कागज पर साइन कराए गए और उसके बाद किसी अधिकारी ने संपर्क नहीं किया।









